
बिलासपुर : जिले के कोटा क्षेत्र में कुल्हाड़ी से युवक की हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है । इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि सुनवाई के दौरान सभी प्रत्यक्षदर्शी और महत्वपूर्ण गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और नए आपराधिक कानून के तहत जुटाए गए ई-डिजिटल साक्ष्यों ने आरोपी का अपराध साबित कर दिया । इन्हीं ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई ।
4 अगस्त 2025 को हुई थी सनसनीखेज हत्या
यह मामला बेलगहना चौकी क्षेत्र के पहाड़बछाली गांव का है । 4 अगस्त 2025 को बृहस्पति बाई के घर में छेदीलाल यादव की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी गई थी । घटना की सूचना मिलने पर कोटवार गंगा बाई गंधर्व की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की ।
24 घंटे में आरोपी गिरफ्तार
तत्कालीन एसएसपी रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में तत्कालीन बेलगहना चौकी प्रभारी एसआई राज सिंह ने फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण किया । जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर आरोपी यशराज भानु उर्फ छोटा (20 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया । पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार किया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली गई ।
मुकर गए गवाह, लेकिन जांच ने बदल दी पूरी तस्वीर
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सभी गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से पलट गए और अदालत में आरोपी के खिलाफ बयान देने से मुकर गए । ऐसे मामलों में अक्सर अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ जाता है, लेकिन इस केस में पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने पूरी तस्वीर बदल दी ।
जांच अधिकारी एसआई राज सिंह ने नए आपराधिक कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए मेमोरेंडम, जब्ती और अन्य महत्वपूर्ण कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियोग्राफी कराई थी । अदालत में यही ई-डिजिटल साक्ष्य सबसे मजबूत प्रमाण बनकर सामने आए ।
फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों ने साबित किया अपराध
अभियोजन पक्ष ने अदालत में फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और डिजिटल रिकॉर्ड पेश किए । अदालत ने माना कि भले ही गवाह मुकर गए हों, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करते हैं ।
अदालत का सख्त फैसला
सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी यशराज भानु उर्फ छोटा को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई । इस फैसले को नए आपराधिक कानून में डिजिटल साक्ष्यों की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है ।
इस निर्णय से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ ही यह संदेश भी गया कि यदि गवाह मुकर जाएं, तब भी वैज्ञानिक जांच और डिजिटल सबूत अपराधियों को सजा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं ।