बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा, मस्तूरी, कोटा और तखतपुर विकासखंड के करीब 8 हजार शिक्षक एवं कर्मचारियों को जुलाई माह का वेतन अब तक नहीं मिल पाया है । वेतन भुगतान में हुई इस देरी के पीछे बीईओ कार्यालयों द्वारा समय पर ट्रेजरी में वेतन बिल प्रस्तुत नहीं किया जाना प्रमुख कारण बताया जा रहा है । ट्रेजरी अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि संबंधित ब्लॉकों से बिल समय पर प्राप्त नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी ।

वेतन नहीं मिलने से शिक्षक और कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं । उनका कहना है कि हर महीने की शुरुआत में होम लोन, वाहन ऋण, मकान की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस और घरेलू खर्च जैसे जरूरी भुगतान करने होते हैं, लेकिन वेतन अटकने से पूरा बजट बिगड़ गया है । कई कर्मचारियों को बैंक की पेनाल्टी और अतिरिक्त ब्याज का भी डर सता रहा है ।

सचिव के निर्देश के बाद भी नहीं भेजे गए वेतन बिल

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने हाल ही में प्रदेशभर के डीईओ और बीईओ की वर्चुअल बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऑफलाइन उपस्थिति के आधार पर जुलाई माह का वेतन तत्काल जारी किया जाए । इसके बावजूद बिलासपुर जिले के चारों बीईओ कार्यालय निर्धारित समय पर ट्रेजरी में वेतन बिल नहीं भेज सके, जिससे हजारों कर्मचारियों का वेतन अटक गया ।

फेडरेशन का आरोप- बीईओ कार्यालय की लापरवाही से बढ़ी परेशानी

सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने बीईओ कार्यालयों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है । उनका कहना है कि समय पर वेतन जारी नहीं होने से शिक्षक आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से परेशान हैं ।

उन्होंने कहा कि अधिकांश शिक्षक बैंक से होम लोन, वाहन ऋण और अन्य वित्तीय दायित्वों से जुड़े हैं । समय पर किस्त नहीं जमा होने पर अतिरिक्त ब्याज और पेनाल्टी का सामना करना पड़ेगा । फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द वेतन जारी नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा ।

बीईओ ने गिनाए देरी के कारण

वेतन बिल में हुई देरी पर संबंधित बीईओ अधिकारियों ने अलग-अलग कारण बताए हैं। बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि जुलाई माह में वार्षिक इंक्रीमेंट लगने के कारण हर साल वेतन बिल तैयार करने में अतिरिक्त समय लगता है । इसके अलावा स्टाफ की कमी और वीएसके एप से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया भी देरी की वजह बनी । उन्होंने बताया कि नियमानुसार 20 तारीख तक बिल तैयार होना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों की संख्या अधिक होने से 29-30 तारीख तक प्रक्रिया पूरी हो पाती है ।

कोटा बीईओ गोपाल दुबे ने बताया कि संबंधित वेतन बिल सोमवार को तैयार कर दिया गया है । इंक्रीमेंट के कारण इस बार प्रक्रिया में विलंब हुआ । वहीं मस्तूरी बीईओ शिवराम टंडन ने भी इंक्रीमेंट और वीएसके एप की प्रक्रिया को देरी का कारण बताते हुए कहा कि बिल ट्रेजरी में जमा कराया जा रहा है और जल्द भुगतान की उम्मीद है ।

हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों को मिला वेतन, प्राथमिक-मिडिल स्कूल अब भी इंतजार में

जिले में 102 हाई स्कूल और 104 हायर सेकेंडरी स्कूल, यानी कुल 206 स्कूल ऐसे हैं जहां प्राचार्य स्वयं डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) हैं। इन स्कूलों ने शासन के नए निर्देश आने से पहले ही वेतन बिल ट्रेजरी भेज दिए थे, इसलिए हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन जारी हो चुका है ।

इसके विपरीत प्राथमिक और मिडिल स्कूलों का वेतन बिल बीईओ कार्यालयों के माध्यम से भेजा जाता है । शासन द्वारा 27 जुलाई को ऑफलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान का आदेश जारी होने के बाद स्थिति को लेकर असमंजस बना रहा और समय पर बिल तैयार नहीं हो सके । इसका खामियाजा अब हजारों शिक्षक-कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है ।

शिक्षकों की मांग- जल्द जारी हो वेतन

शिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण वेतन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है । उनका कहना है कि विभाग को तत्काल वेतन बिलों की प्रक्रिया पूरी कर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके ।