रायपुर:राजधानी रायपुर में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई 'सरकारी धनवंतरी मेडिकल स्टोर' योजना की साख पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। योजना के तहत मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रायपुर के एक धनवंतरी मेडिकल स्टोर से खरीदी गई 'कॉर्सीप्लेक्स-एल' (Corsiplex-L) सिरप की सीलबंद बोतल में कई मरी हुई चींटियां तैरती हुई पाई गई हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है और मरीजों की जान के साथ हो रहे इस सीधे खिलवाड़ को लेकर प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता कान्हा गौराहा ने धनवंतरी मेडिकल स्टोर से विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स की 'कॉर्सीप्लेक्स-एल' सिरप खरीदी थी। जब उन्होंने सेवन के लिए सीलबंद बोतल को खोला और दवा निकाली, तो भीतर का नजारा देखकर वे सन्न रह गए। दवा के अंदर कई मृत चींटियां मौजूद थीं। गनीमत यह रही कि शिकायतकर्ता ने दवा पीने से पहले ही इसे देख लिया और इसका सेवन नहीं किया।

बोतल पर दर्ज जानकारी के मुताबिक:

  •  बैच नंबर: FNH25879
  •  निर्माण (Manufacturing): नवंबर 2025
  •  एक्सपायरी (Expiry) अक्टूबर 2027
  •  निर्माता कंपनी: नॉल फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड

सीलबंद बोतल के भीतर इस तरह की अशुद्धि मिलने से पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और भंडारण व्यवस्था की घोर लापरवाही उजागर हुई है।

 जानलेवा हो सकती है लापरवाही

मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. योगेंद्र महोत्रा ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि किसी भी जीवनरक्षक औषधि या सीरप में बाहरी जीव-जंतु, कीट या अन्य अशुद्धियों का पाया जाना बेहद गंभीर मामला है। यदि भूलवश कोई मरीज ऐसी दूषित दवा का सेवन कर ले, तो उसे गंभीर एलर्जी, पेट संबंधी जानलेवा परेशानियां, फूड पॉइजनिंग और भयंकर संक्रमण हो सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) वाले मरीजों पर इसका घातक प्रभाव पड़ सकता है।

लगातार फेल हो रही गुणवत्ता: पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

प्रदेश में दवाओं की घटिया गुणवत्ता का यह कोई पहला मामला नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। वर्ष 2025 में भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में विभिन्न जिलों से लिए गए कई दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे थे और आईवी फ्लूड की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे थे। हालिया महीनों में भी कई लापरवाही उजागर हुई हैं:

 मई 2026:ऑक्सीटोसिन सहित दर्द, बुखार और सर्दी-जुकाम की कई दवाएं (नाक्यैन-पी, फ्लामो स्टार-एपी, एसीएचई पी और कोल्ड जिया टैबलेट्स) गुणवत्ता जांच में अमानक (Substandard) घोषित की गई थीं।

 अप्रैल 2026: सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किए गए यूरो बैग फटे हुए और लीकेज वाले पाए गए थे।

 जनवरी 2026: बच्चों को पिलाई जाने वाली कृमिनाशक 'एल्बेंडाजोल टैबलेट' के 6 बैचों में खराबी पाए जाने के बाद उनके उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगानी पड़ी थी।