शिमला। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नालागढ़ पुलिस थाना परिसर के पास हुए IED धमाके की जांच अब एक बड़े नेटवर्क तक पहुंचती नजर आ रही है। 1 जनवरी 2026 को हुए इस विस्फोट के मामले में जांच एजेंसियों ने आरोपियों और उनके कथित नेटवर्क से जुड़ी कड़ियों को खंगालना तेज कर दिया है। मामले में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस इस बात पर है कि धमाके की साजिश किसने रची, विस्फोटक कहां से आया और इसके पीछे बैठे लोगों का मकसद क्या था।

पुलिस स्टेशन के पास धमाका, जांच ने लिया आतंकी एंगल
नालागढ़ थाने के नजदीक हुए विस्फोट ने शुरुआत से ही सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था। मामला सामान्य आपराधिक घटना से आगे बढ़कर संभावित आतंकी साजिश से जुड़ा होने के कारण केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में आया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने इस मामले में RC-03/2026/NIA/DLI के तहत जांच दर्ज की है। NIA के रिकॉर्ड में मामले को पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने और दहशत फैलाने की नीयत से किए गए विस्फोट के तौर पर दर्ज किया गया है।

दो प्रमुख आरोपियों की पहले हो चुकी गिरफ्तारी
जांच में पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने फरवरी में महावीर उर्फ काका और मनप्रीत उर्फ मणि को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक दोनों का संबंध नालागढ़ पुलिस स्टेशन में हुए RDX आधारित IED धमाके से सामने आया था। कार्रवाई के दौरान एक 9 एमएम ग्लॉक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। इससे पहले जनवरी में पंजाब पुलिस ने इस मामले से जुड़े दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से IED बरामद करने का दावा किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह विस्फोटक पंजाब से हिमाचल तक पहुंचाया गया था और बाद में नालागढ़ में इस्तेमाल किया गया।

विदेशी हैंडलर्स से कनेक्शन की भी जांच
मामले की जांच में कथित तौर पर विदेश में बैठे हैंडलर्स और प्रतिबंधित आतंकी नेटवर्क से जुड़े कनेक्शन की बात भी सामने आई है। पंजाब पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों को विदेशी ठिकानों से निर्देश मिल रहे थे और इस पूरी कार्रवाई में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, इन दावों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

अब जांच का सबसे बड़ा सवाल—कौन है असली मास्टरमाइंड?
नालागढ़ ब्लास्ट की जांच अब सिर्फ विस्फोट करने वालों तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि IED किसने उपलब्ध कराया, इसे नालागढ़ तक कौन लेकर आया, आरोपियों को निर्देश और संसाधन किसने दिए और इस साजिश के पीछे अंतिम मकसद क्या था। जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम कड़ी कथित फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक हैं। यानी धमाके को अंजाम देने वाले लोगों से लेकर उन्हें निर्देश देने वाले कथित हैंडलर्स तक पूरी श्रृंखला को जोड़ना।

नालागढ़ ब्लास्ट ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
पुलिस स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान के पास IED का इस्तेमाल किए जाने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब एजेंसियां इस मामले से जुड़े हर आरोपी, विस्फोटक की सप्लाई और कथित आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं। नालागढ़ ब्लास्ट केस में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साजिश की परतें खुलने की उम्मीद है। अब नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां कथित मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क तक कब पहुंचती हैं।