
बलौदाबाजार। बलौदाबाजार शहर के बस स्टैंड परिसर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर पालिका की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नाली निर्माण कार्य के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को उसके स्थान से हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय जमीन पर छोड़ दिया गया, जहां वह लगातार दो दिनों तक कीचड़ में पड़ी रही। घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन किसी महापुरुष की प्रतिमा को हटाने के दौरान उसकी गरिमा और सम्मान बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
नाली निर्माण के लिए हटाई गई थी प्रतिमा
जानकारी के अनुसार, बस स्टैंड परिसर में नगर पालिका द्वारा नाली निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान वहां स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को हटाया गया था। आरोप है कि प्रतिमा को किसी सुरक्षित स्थान पर रखने या अस्थायी रूप से सम्मानजनक तरीके से स्थापित करने के बजाय उसे सीधे जमीन पर रख दिया गया। बारिश के कारण आसपास कीचड़ हो गया और प्रतिमा उसी स्थिति में दो दिनों तक पड़ी रही।
नगर पालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर प्रतिमा रखी गई थी, वह नगर पालिका अध्यक्ष कार्यालय से भी अधिक दूर नहीं है, इसके बावजूद दो दिनों तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के कारण प्रतिमा हटाना आवश्यक था, तो पहले से वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी, ताकि प्रतिमा का सम्मान बना रहता। इस घटना को लेकर नगर पालिका की लापरवाही पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा शासित क्षेत्र होने से बढ़ी चर्चा
यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि बलौदाबाजार जिले में प्रदेश सरकार के मंत्री टंकराम वर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन सहित जिला पंचायत और कई प्रमुख संस्थाओं में भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधि जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भाजपा की वैचारिक प्रेरणा का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। ऐसे में उनकी प्रतिमा की यह स्थिति सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
लोगों ने उठाए कई सवाल
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या महापुरुषों का सम्मान केवल जयंती और पुण्यतिथि तक सीमित रह गया है? उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित प्रतिमाओं की देखरेख और सम्मान बनाए रखना प्रशासन और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। लोगों ने मांग की है कि प्रतिमा को तत्काल सम्मानपूर्वक उसके स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए तथा पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल, इस मामले को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है। लोगों की नजर अब इस बात पर है कि नगर पालिका, जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि इस घटना पर क्या रुख अपनाते हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाती है या नहीं।