रायपुर ।आम जनता की समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए शुरू किया गया 'निदान 1100' सिस्टम अब खुद सुस्त और बीमार हो गया है। शिकायतों के निपटारे की रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों का इस 'त्वरित समाधान' वाली व्यवस्था से भरोसा उठने लगा है। लापरवाही और सिस्टम की सुस्ती का एक बड़ा और हैरान करने वाला उदाहरण टुंडा इलाके से सामने आया है। यहां सड़क पर बैठे गोवंश को हटाने के लिए 19 अगस्त को शिकायत (नंबर-20260819765033) दर्ज कराई गई थी, लेकिन सिस्टम को हरकत में आने और शिकायतकर्ता से संपर्क करने में ही 47 दिन लग गए।

शिकायतकर्ता के पास सीधे 5 अक्टूबर को कॉल आया। 47 दिन बाद कॉल कर पूछा गया कि समस्या वाली लोकेशन कहाँ है। यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की कार्यप्रणाली का एक नमूना भर है।

पेंडेंसी का अंबार: 450 शिकायतें धूल फांक रहीं

जानकारी के अनुसार, निदान 1100 में फिलहाल करीब 450 शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं, जिनका अब तक कोई निराकरण नहीं हो सका है। वहीं, हर महीने औसतन 450 से 500 नई शिकायतें दर्ज हो रही हैं। टुंडा मामले में 47 दिन बाद आए कॉल से यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि लंबित शिकायतों पर कार्रवाई की रफ्तार कितनी लचर और धीमी है। अगर यही हाल रहा तो पेंडेंसी का यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा, और 'निदान' सिर्फ एक नाम बनकर रह जाएगा।

नवा रायपुर में भी सड़कों पर मवेशियों का डेरा

मवेशियों की समस्या सिर्फ शहर के भीतर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रशासनिक केंद्र नवा रायपुर में भी गंभीर रूप ले चुकी है। यहां सुबह से लेकर देर रात तक कई प्रमुख सड़कों पर गोवंश के झुंड बैठे नजर आते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक सड़क पर मवेशियों के आ जाने से हर समय बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है। आम लोगों से लेकर बड़े अफसरों तक को नवा रायपुर में आवाजाही के दौरान इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन एनआरडीए (NRDA) स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस और प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

 पुलिस ने भी खड़े किए हाथ, 112 से मिला जवाब - यह हमारे दायरे में नहीं

जब सड़कों पर बैठे मवेशियों के कारण दुर्घटना की आशंका को देखते हुए और तत्काल मदद की उम्मीद में डायल 112 पर कॉल किया गया, तो वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। पुलिस की ओर से साफ और दो टूक जवाब मिला कि यह समस्या उनके दायरे में नहीं आती और इसका समाधान उनके स्तर पर नहीं हो सकता। 112 जैसी इमरजेंसी सेवा के इस जवाब ने लोगों को और भी असहाय कर दिया है।

निदान 1100 में हर महीने 500 नई शिकायतें आ रही हैं और 450 से ज्यादा केस पहले से धूल फांक रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लंबित शिकायतों के निपटारे की समयसीमा (Time Limit) क्या तय की गई है? जब एक शिकायत पर 47 दिन बाद कॉल आ रहा है और 112 जैसी इमरजेंसी सेवा भी मवेशियों के मामले में हाथ खड़े कर दे रही है, तो आम आदमी तत्काल मदद के लिए आखिर कहां जाए? क्या महीनों बाद आने वाले एक फोन कॉल को 'त्वरित समाधान' कहा जा सकता है?

 

निदान में शिकायत प्राप्त होने के बाद त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश हैं। अगर किसी कारण से देरी की जा रही होगी तो इसे चेक करवा लेते हैं।"

  • विनोद पांडे, अपर आयुक्त,
  • नगर निगम रायपुर