Screenshot_20260516_124439_Samsung Notesरायपुर। पुलिस महकमे के सर्वोच्च पद को लेकर आखिरकार अब स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई है। 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी अरुण देव गौतम अब राज्य के नए पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) होंगे। अब तक वे प्रभारी डीजीपी के तौर पर पुलिस मुख्यालय (PHQ) की अहम कमान संभाल रहे थे। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए गठित उच्च स्तरीय पैनल की अनुशंसा के बाद राज्य शासन के गृह विभाग ने उन्हें नियमित रूप से डीजीपी के पद पर पदस्थ करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

 

यूपीएससी के पैनल ने लगाई अंतिम मुहर

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और नियमों के मुताबिक, पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का एक पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा जाता है। यूपीएससी की एम्पैनलमेंट कमेटी इन नामों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, मेरिट और बेदाग छवि के आधार पर विचार करती है। इसी प्रक्रिया के तहत यूपीएससी की ओर से नामों का पैनल राज्य शासन को भेजा गया था, जिसमें से राज्य सरकार ने वरिष्ठता और अनुभव को तरजीह देते हुए अरुण देव गौतम के नाम पर अंतिम मुहर लगाई है। इस आदेश के साथ ही पुलिस महकमे में नियमित डीजीपी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर भी विराम लग गया है।

प्रशासनिक और फील्ड पुलिसिंग का लंबा अनुभव

वरिष्ठ आईपीएस अरुण देव गौतम की गिनती प्रदेश के सबसे अनुभवी, सुलझे हुए और विजनरी पुलिस अधिकारियों में होती है। साल 1992 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में कदम रखने वाले गौतम ने अपने तीन दशक से अधिक के करियर में कई बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

फील्ड पुलिसिंग के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर उनका ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ही शानदार रहा है। वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने, क्राइम कंट्रोल की सटीक मॉनिटरिंग और पुलिस कल्याण के मामलों में अपनी गहरी समझ और त्वरित निर्णय क्षमता के लिए जाने जाते हैं। प्रभारी डीजीपी रहते हुए भी उन्होंने बेसिक पुलिसिंग में कसावट लाने और महकमे को चुस्त-दुरुस्त करने के कई अहम निर्देश दिए थे। अब पूर्णकालिक और नियमित डीजीपी के तौर पर नियुक्ति के बाद, माना जा रहा है कि उनके इस व्यापक अनुभव का सीधा लाभ राज्य की कानून व्यवस्था, नक्सल मोर्चे पर चल रहे ऑपरेशंस और पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने में मिलेगा।