
बिलासपुर : कोरिया नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अनिल कुमार प्रजापति के ओबीसी जाति प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने उन्हें वैधानिक उपाय अपनाने का अवसर दिया है। कोर्ट ने जिला स्तरीय जाति छानबीन समिति के आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति के समक्ष अपील करने का निर्देश दिया है। इसके लिए आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर अपील प्रस्तुत करनी होगी। निर्धारित समय में अपील के साथ अंतरिम राहत का आवेदन देने पर हाई कोर्ट से पहले मिला संरक्षण एक माह तक प्रभावी रहेगा। मामले की सुनवाई जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। अनिल प्रजापति की ओर से अधिवक्ता रोहित शर्मा और अभिषेक के सिंह ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता विवेक वर्मा और शिकायतकर्ता प्रकाश त्रिपाठी की ओर से अधिवक्ता शिखर शर्मा उपस्थित हुए।
शिकायत के बाद निरस्त हुआ था जाति प्रमाणपत्र
अनिल कुमार प्रजापति को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, मनेंद्रगढ़ ने 13 नवंबर 2019 को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का जाति प्रमाणपत्र जारी किया था। इसके बाद मनेंद्रगढ़ आमाखेरवा रोड निवासी प्रकाश त्रिपाठी ने उनके जाति प्रमाणपत्र और सामाजिक दर्जे पर आपत्ति दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति ने 18 जून 2021 को अनिल प्रजापति को नोटिस जारी कर संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने कहा।
अनिल प्रजापति समिति के समक्ष उपस्थित हुए और अपने ओबीसी दर्जे के समर्थन में दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। दस्तावेजों पर विचार करने के बाद समिति ने 27 अगस्त 2021 को जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने का आदेश जारी किया। समिति का कहना था कि अनिल प्रजापति छत्तीसगढ़ में ओबीसी का लाभ लेने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी करना साबित नहीं कर सके हैं।
राज्य सरकार ने बताया अपील का विकल्प, पुराने अंतरिम संरक्षण को जारी रखने की मांग
जिला स्तरीय समिति के आदेश को चुनौती देते हुए अनिल प्रजापति ने अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि समिति के आदेश के खिलाफ उच्च स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति में अपील करने का वैधानिक विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर करना उचित नहीं है।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से भी उच्च स्तरीय समिति के समक्ष अपील करने की सहमति जताई गई। हालांकि, उनके अधिवक्ताओं ने बताया कि अनिल प्रजापति कोरिया नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष हैं और हाई कोर्ट की समन्वय पीठ ने 27 सितंबर 2021 को उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया था। संरक्षण समाप्त होने से वैधानिक उपाय अपनाने में परेशानी हो सकती है।
15 दिन में अपील, एक माह तक जारी रहेगा अंतरिम संरक्षण
हाई कोर्ट ने पाया कि 27 सितंबर 2021 को समन्वय पीठ ने याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर मिलने और छत्तीसगढ़ सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणपत्र अधिनियम, 2013 की प्रक्रिया के पालन से जुड़े सवालों पर विचार करते हुए जिला स्तरीय समिति के 27 अगस्त 2021 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई थी।
अब हाई कोर्ट ने अनिल प्रजापति को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर उच्च स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति के समक्ष अपील प्रस्तुत करने कहा है। अपील के साथ अंतरिम राहत या रोक के लिए आवेदन भी दिया जा सकेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में अपील और अंतरिम राहत का आवेदन पेश किए जाने पर 27 सितंबर 2021 का अंतरिम आदेश अपील दायर करने की तारीख से एक माह तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान उच्च स्तरीय समिति अंतरिम राहत के आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय ले सकेगी।