पेंड्रा। निर्माणाधीन NH-45 इन दिनों वाहन चालकों के लिए राहत की सड़क कम और मुसीबत का रास्ता ज्यादा बनता जा रहा है। बारिश के बाद सड़क के कई हिस्से कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गए हैं। वहीं वाहनों को निकालने के लिए बनाए गए वैकल्पिक बाईपास भी परेशानी कम करने के बजाय नई मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण चपोरा गांव के पास देखने को मिला, जहां एक यात्री बस एक ही दिन में दो बार सड़क पर फंस गई। दोनों बार बस को निकालने के लिए क्रेन की मदद लेनी पड़ी।

पहले मुख्य सड़क पर फंसी बस, फिर बाईपास ने भी छोड़ा नहीं
बताया गया कि बारिश के बाद चपोरा गांव के पास निर्माणाधीन सड़क का एक हिस्सा बेहद खराब हो गया था। इसी दलदली हिस्से से गुजरते समय यात्री बस फंस गई। पहियों के कीचड़ में धंसने के बाद बस आगे नहीं बढ़ सकी। काफी मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से बस को बाहर निकाला गया। इसके बाद बस को मुख्य मार्ग से हटाकर बनाए गए वैकल्पिक बाईपास से आगे भेजने की कोशिश की गई।

लेकिन यहां भी समस्या खत्म नहीं हुई।
बाईपास की कम चौड़ाई और खराब सतह के कारण बस दोबारा फंस गई। आखिरकार दूसरी बार क्रेन बुलानी पड़ी और काफी प्रयास के बाद बस को वहां से निकाला जा सका।

एक बस, दो बार फंसी, व्यवस्था पर बड़ा सवाल
एक ही दिन में एक ही यात्री बस के दो अलग-अलग जगहों पर फंसने की घटना ने निर्माणाधीन हाईवे की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क की हालत तेजी से खराब हो जाती है। कई जगह पानी जमा होने के साथ मिट्टी और मुरम कमजोर होकर दलदल जैसी स्थिति बना लेते हैं। ऐसे में भारी और यात्री वाहनों के लिए गुजरना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।

बाईपास है तो सुरक्षित क्यों नहीं?
निर्माणाधीन हाईवे पर काम जारी रहने के दौरान वाहनों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर वही बाईपास वाहन के वजन और यातायात का दबाव नहीं झेल पा रहा, तो उसे यातायात के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों दी जा रही है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर बाईपास संकरा, कच्चा और पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं है। बारिश के बाद इन रास्तों की स्थिति और खराब हो जाती है।

जाम ने बढ़ाई आम लोगों की परेशानी
वाहनों के फंसने से केवल यात्री ही परेशान नहीं हो रहे, बल्कि सड़क पर लंबा जाम भी लग रहा है। इसका सीधा असर मरीजों, स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, बस यात्रियों और ग्रामीणों पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, किसी वाहन के फंसते ही उसे निकालने में काफी समय लग जाता है और पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर होने की आशंका है।

निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
NH-45 का निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है, लेकिन मौजूदा स्थिति ने निर्माण की गति के साथ-साथ गुणवत्ता और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।लोगों का कहना है कि निर्माण पूरा होने तक यातायात को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सड़क का काम चल रहा है तो वैकल्पिक मार्गों को सुरक्षित, चौड़ा और मजबूत बनाना जरूरी है, ताकि निर्माण कार्य के दौरान जनता को जोखिम न उठाना पड़े।

लोगों ने मांगी बाईपास की तकनीकी जांच
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि NH-45 पर बनाए गए सभी डायवर्जन और बाईपास की तत्काल तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराई जाए। जहां सड़क कमजोर है, वहां सुधार कार्य कराया जाए और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए। विकास के लिए सड़क बनना जरूरी है, लेकिन निर्माणाधीन सड़क के नाम पर अगर रोजाना जाम, कीचड़ और दुर्घटना का खतरा लोगों की मजबूरी बन जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पेंड्रा में एक ही बस का दिन में दो बार फंसना इसी परेशानी की तस्वीर दिखा रहा है।