
रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी या गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वालों पर सरकार ने एक बार फिर कार्रवाई का रुख कड़ा कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागों को ऐसे मामलों की ताजा स्थिति तत्काल जुटाकर एकीकृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। सबसे अहम निर्देश यह है कि जिन मामलों में अदालत से कोई स्थगन आदेश यानी स्टे नहीं है, उनमें सेवा समाप्ति की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए। सरकार के इस निर्देश के बाद वर्षों से लंबित फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में फिर से हलचल बढ़ गई है।
267 मामलों में जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के बाद से फर्जी जाति प्रमाण पत्र से संबंधित 758 शिकायतें सामने आई थीं। इनमें से 659 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के बाद 267 अधिकारियों-कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी या गलत पाए जाने की पुष्टि हुई है। इन मामलों में संबंधित कर्मचारियों की सरकारी सेवा पर कार्रवाई का सवाल लंबे समय से बना हुआ है।
हाईकोर्ट के स्टे से कई मामलों में अटकी कार्रवाई
फर्जी प्रमाण पत्र साबित होने के बाद भी बड़ी संख्या में मामलों में सेवा समाप्ति की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। इसकी प्रमुख वजह संबंधित कर्मचारियों को अदालत से मिला स्थगन आदेश बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 267 प्रमाणित मामलों में से 250 से अधिक मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का स्टे प्रभावी है। ऐसे मामलों में सरकार न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। वहीं, जिन मामलों में किसी अदालत से रोक नहीं है, उनमें अब विभागों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागों से मांगा गया पूरा रिकॉर्ड
11 अगस्त 2026 को जारी पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से लंबित मामलों की अद्यतन जानकारी मांगी है।
रिपोर्ट में विभागों को यह बताना होगा कि
- कितने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले सामने आए?
- कितने मामलों में जांच पूरी हुई?
- कितने प्रमाण पत्र फर्जी या गलत पाए गए?
- कितने कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई?
- किन मामलों में विभागीय कार्रवाई लंबित है?
- किन मामलों में न्यायालय का स्थगन आदेश लागू है?
सरकार चाहती है कि सभी विभागों से प्राप्त जानकारी को एक जगह संकलित कर सामान्य प्रशासन विभाग और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को भेजा जाए।
2019 से लगातार दिए जा रहे थे कार्रवाई के निर्देश
सरकार ने अपने नए निर्देश में यह भी याद दिलाया है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों को लेकर 2019 से 2022 के बीच कई बार परिपत्र और अनुस्मारक जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई विभागों से कार्रवाई की मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं मिलने पर अब दोबारा सभी विभागों को प्राथमिकता के साथ रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है।
अब ‘स्टे नहीं तो एक्शन’ पर जोर
सरकार के ताजा निर्देश का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जिन कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र को उच्च स्तरीय छानबीन समिति पहले ही फर्जी, गलत या अमान्य घोषित कर चुकी है, और जिन मामलों में अदालत की ओर से कोई रोक नहीं है, उनमें कार्रवाई को अनिश्चितकाल तक लंबित न रखा जाए। अब विभागों को ऐसे मामलों की पहचान कर सेवा समाप्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
वर्षों पुराने मामलों की फिर खुलेगी फाइल?
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों में शिकायत से लेकर जांच और फिर न्यायिक प्रक्रिया तक कई मामले वर्षों से लंबित हैं। सरकार के ताजा निर्देश से इन मामलों की स्थिति फिर से सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, जिन प्रकरणों में न्यायालय का स्टे लागू है, उनमें अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।