
दुर्ग : शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को निलंबित कर दिया है। वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी पीएचडी डिग्री, शासकीय वाहन के कथित दुरुपयोग और आपराधिक न्यास भंग जैसे गंभीर आरोपों के चलते उच्च शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। निलंबन के साथ ही कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय में मुख्यालय अटैच किया गया है। मामले में अब विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
कर्मचारी के वेतन किया बेटे के खाते में ट्रांसफर
भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ सबसे गंभीर मामला अर्द्धकुशल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन से जुड़ा है। आरोप है कि कर्मचारी के वेतन में से 1 लाख 49 हजार 384 रुपये उनके बेटे के खाते में ट्रांसफर कराए गए। इस मामले में दुर्ग के मोहन नगर थाने में पूर्व कुलसचिव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला अब उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
दुर्घटनाग्रस्त कार की मरम्मत के बिल का आरोप
उच्च शिक्षा आयुक्त ने शासकीय वाहन के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए डॉ अनुपमा अस्थाना और डॉ अजय सिंह की दो सदस्यीय समिति गठित की थी। जांच में दुर्घटनाग्रस्त कार की मरम्मत के नाम पर बीमा क्लेम के बिना फर्जी बिल जमा कर राशि निकालने की बात सामने आने का दावा किया गया है। इसके अलावा वाहन के ओडोमीटर में करीब 5,000 किलोमीटर की छेड़छाड़ किए जाने का आरोप भी जांच के दायरे में हैं। समिति ने कुलपति के अधिकारों का बिना अनुमोदन इस्तेमाल किए जाने से जुड़े मामले में राशि की वसूली और विधिक कार्रवाई की अनुशंसा भी की थी। इन निष्कर्षों ने वाहन के इस्तेमाल और उससे जुड़े खर्चो को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
फर्जी पीएचडी डिग्री की भी जांच
कुलदीप पर फर्जी पीएचडी डिग्री से जुड़ा आरोप भी है। इस मामले की जांच निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने की है। वित्तीय लेनदेन, वाहन प्रकरण और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े आरोपों के चलते मामला कई स्तरों पर जांच के दायरे में है।
सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत भूपेंद्र कुलदीप को निलंबित किया है। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय रहेगा। उनके खिलाफ विभागीय जांच के लिए अलग से आरोप पत्र जारी किया जाएगा। अब विभागीय जांच में आरोपों और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल होगी।
