नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े इस मामले में शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र की निचली अदालत में आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, अदालत ने अभी मामले के आरोपों या उनकी कानूनी वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी
यह मामला वर्ष 2018 में राजस्थान में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिए गए राहुल गांधी के कथित बयान से जुड़ा है। इस प्रकरण में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस समन को रद्द कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2026 को अपने आदेश में समन रद्द करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब शीर्ष अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई तक निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इस आदेश से मामले की कानूनी प्रक्रिया में फिलहाल ठहराव आया है।

क्या है राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?
शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक सार्वजनिक सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। शिकायतकर्ता ने इन बयानों को आपराधिक मानहानि का आधार बनाया था। यह शिकायत राजनीतिक रूप से चर्चित राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर चल रही बहस के संदर्भ में सामने आई थी। शिकायत में राहुल गांधी के कथित बयान और इस्तेमाल किए गए शब्दों को आधार बनाकर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों को अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

राफेल विवाद और ‘चौकीदार चोर है’ बयान का क्या है संबंध?
राफेल सौदे को लेकर वर्ष 2018 में देश की राजनीति में तीखी बहस हुई थी। इसी दौरान राहुल गांधी के भाषणों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, राजस्थान की सभा में दिए गए बयान से प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में बयान के संदर्भ, शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर न्यायिक विचार होना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार तथा शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत के इस आदेश का अर्थ यह है कि फिलहाल निचली अदालत में आगे की कार्यवाही नहीं चलेगी। लेकिन इससे मानहानि के आरोप समाप्त नहीं हो जाते और न ही इसे राहुल गांधी की अंतिम कानूनी जीत या दोषमुक्ति माना जा सकता है।

अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखना होगा। जवाब दाखिल होने के बाद शीर्ष अदालत मामले पर आगे सुनवाई करेगी और उसके अनुसार अगला आदेश दे सकती है। फिलहाल, सबसे अहम बात यह है कि राहुल गांधी को इस मामले में अंतरिम राहत मिली है और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगी है। अब आगे की कानूनी दिशा सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी।