
रायपुर: Raipur नगर निगम में एक बार फिर महत्वपूर्ण दस्तावेज के लापता होने का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार नगर निगम मुख्यालय के सामने स्थित गार्डन से जुड़ी अहम फाइल गायब बताई जा रही है। इससे पहले जोन-10 से करीब 100 एकड़ जमीन से संबंधित फाइल गायब होने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब एक और संवेदनशील दस्तावेज के लापता होने से हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित गार्डन का मामला पहले से ही नियमों के उल्लंघन और व्यावसायिक उपयोग को लेकर विवादों में रहा है। नगर निगम द्वारा रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी गई थी, जिसमें सीमित दायरे में दुकानों और फूड स्टॉल की अनुमति दी गई थी। हालांकि आरोप है कि तय सीमा से अधिक क्षेत्र का उपयोग व्यवसायिक गतिविधियों के लिए किया गया, जिससे नियमों की अनदेखी का मामला गहराता गया।
निगम के नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि किसी भी उद्यान के कुल क्षेत्रफल के केवल 5% हिस्से में ही व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा सुरक्षा, साफ-सफाई और सीसीटीवी जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना भी अनिवार्य होता है। बावजूद इसके, मौके पर इन व्यवस्थाओं में लगातार कमी और अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं, जिससे अब दस्तावेजों में संभावित छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए महापौर Meenal Choubey ने सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नगर निगम प्रशासन पूरे मामले की तह तक जाने के लिए रिकॉर्ड खंगाल रहा है।
इसी बीच, जोन-10 अमलीडीह कार्यालय से 100 एकड़ जमीन से जुड़ी फाइल गायब होने के मामले ने भी तूल पकड़ रखा है। बोरियाकला क्षेत्र के कई भूखंडों से संबंधित इस फाइल के गायब होने के पीछे बिल्डरों को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए संबंधित अधिकारी को मुख्यालय अटैच कर दिया है और एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने नगर निगम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
