
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज होने के बाद गांजा तस्करी से जुड़े नेटवर्क के तौर-तरीकों में बदलाव सामने आया है। अब तस्करों द्वारा सीधे ओडिशा जाकर गांजा लाने के बजाय सप्लाई को रायपुर तक पहुंचाने के लिए नए माध्यमों और कथित कोड वर्ड का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों से संपर्क करने और रायपुर तक गांजा पहुंचाने की पेशकश की जा रही थी। बातचीत में डिलीवरी और भुगतान से जुड़े अलग-अलग विकल्पों की भी चर्चा हुई।
सोशल मीडिया पर दिख रहा ‘हरी पत्तियों’ का इशारा
स्टिंग के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापन सामने आने का दावा किया गया, जिनमें सीधे तौर पर गांजे का नाम लेने से बचते हुए ‘ग्रीन लीफ’ और ‘ओडिशा साग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। विज्ञापन में रायपुर में ओडिशा से कथित तौर पर ‘हाई क्वालिटी’ सामान उपलब्ध कराने और घर तक पहुंचाने की बात कही गई थी। भुगतान को लेकर भी अलग-अलग विकल्प बताए गए थे। जांच के दौरान ऐसे ही एक सोशल मीडिया अकाउंट से संपर्क किए जाने पर आगे बातचीत व्हाट्सऐप के जरिए होने की बात सामने आई।
बातचीत में सामने आया डिलीवरी का दावा
स्टिंग ऑपरेशन के मुताबिक, कथित तौर पर रायपुर तक माल पहुंचाने के लिए करीब 15 हजार रुपये में सौदा तय होने की बात सामने आई हैं। बातचीत से यह भी संकेत मिला कि संपर्क में आया व्यक्ति सीधे मुख्य सप्लायर के बजाय एक बिचौलिये की भूमिका में हो सकता है। कीमत तय करने से पहले उसने किसी अन्य व्यक्ति से बात कर रेट की जानकारी लेने की बात कही। हालांकि, यह पूरा मामला स्टिंग में हुई बातचीत पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुलिस पुष्टि जांच का विषय है।
कुरियर से लेकर घर तक पहुंचाने की पेशकश का दावा
बातचीत के दौरान कथित सप्लायर ने डिलीवरी के कई विकल्प बताए। इनमें पते पर सामान भेजने और रायपुर में सीधे डिलीवरी करने जैसे विकल्पों की चर्चा होने का दावा किया गया। भुगतान को लेकर भी बातचीत में पहले ऑनलाइन पेमेंट और डिलीवरी के बाद भुगतान जैसे विकल्पों का जिक्र सामने आया। इससे संकेत मिलता है कि तस्करी का नेटवर्क पारंपरिक तरीके से अलग होकर डिलीवरी आधारित मॉडल अपनाने की कोशिश कर रहा है।
पुलिस की सख्ती से बदली तस्करों की रणनीति
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रायपुर में मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई किए जाने के कारण स्थानीय तस्करों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में दूसरे राज्यों से जुड़े सप्लायर खुद या अलग-अलग माध्यमों के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, ओडिशा से आने वाले गांजे की सप्लाई रोकने के लिए पुलिस द्वारा नेटवर्क की कड़ी-दर-कड़ी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि सिर्फ सीधे तस्करी करने वालों पर ही नहीं, बल्कि कुरियर या अन्य माध्यमों से मादक पदार्थ मंगाने वालों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
एंड-टू-एंड नेटवर्क पर पुलिस की नजर
पुलिस का फोकस अब केवल गांजा लेकर आने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं है। सप्लायर, स्थानीय बिचौलिये, डिलीवरी चैनल और खरीदारों तक पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए नशीले पदार्थों की कथित बिक्री और डिलीवरी के मामले सामने आने के बाद ऑनलाइन गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि मादक पदार्थों की अवैध सप्लाई से जुड़े किसी भी माध्यम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सोशल मीडिया विज्ञापनों और स्टिंग में सामने आई बातचीत की स्वतंत्र जांच तथा संबंधित व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका की पुष्टि होना बाकी है।