
नई दिल्ली। चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत रद्द कर दी है। सर्वोच्च अदालत ने सोनम को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर मुकदमे की सुनवाई निर्धारित समय में आगे नहीं बढ़ती है, तो वह छह महीने बाद नई जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
मेघालय सरकार की याचिका पर आया फैसला
यह मामला इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। मई 2025 में राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे, जहां पूर्वी खासी हिल्स जिले में उनकी हत्या कर दी गई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि हत्या कथित तौर पर सुपारी किलरों के जरिए कराई गई। निचली अदालत द्वारा सोनम को दी गई जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने अदालत को बताया कि मामले में 94 गवाह हैं, जिनमें से अब तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और सोनम जमानत की सभी शर्तों का पालन कर रही हैं। वकील ने यह भी तर्क दिया कि सोनम ने आत्मसमर्पण नहीं किया था, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। उनका कहना था कि गिरफ्तारी को सरेंडर के रूप में प्रस्तुत किया जाना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
सॉलिसिटर जनरल ने जताई फरार होने की आशंका
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों के अनुसार आरोपी ने आत्मसमर्पण किया था और इस संबंध में उठाए गए तकनीकी तर्क पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने अदालत से कहा कि आरोपी के बाहर रहने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने और फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले ही दे दिए थे दो विकल्प
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के सामने दो विकल्प रखे थे, या तो वह स्वेच्छा से सरेंडर करें या अदालत उनकी जमानत रद्द करने का आदेश पारित करे। गुरुवार को अदालत ने जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश जारी कर दिया।
सोनम ने खुद को बताया निर्दोष
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सोनम रघुवंशी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर आधारित है। उनका कहना है कि केवल आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता और अंतिम निर्णय ट्रायल के बाद ही होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने बदलते सामाजिक परिवेश और नई पीढ़ी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में जानकारी अधिक है, लेकिन दबाव झेलने की क्षमता कम होती जा रही है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि "जानकारी ज्यादा है, लेकिन ज्ञान नहीं।" इस दौरान पीठ ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली सूचनाओं पर भी टिप्पणी की।