
अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच अब और व्यापक होती जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल के बीच मंदिर प्रशासन में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों और ट्रस्ट की आंतरिक समीक्षा के दायरे में 100 से अधिक कर्मचारी और विभिन्न सेवा एजेंसियों से जुड़े कर्मी हैं। यदि जांच और समीक्षा में उनकी भूमिका संदिग्ध या उनकी सेवाएं अनावश्यक पाई जाती हैं, तो आने वाले समय में उनकी सेवाएं समाप्त किए जाने पर फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या एसआईटी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
चढ़ावा चोरी के बाद कई कर्मचारियों से हुई पूछताछ
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने मंदिर से जुड़े कई कर्मचारियों और सेवा प्रदाता एजेंसियों के कर्मियों से पूछताछ की है। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर यदि किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जांच एजेंसियां फिलहाल मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं और आधिकारिक रूप से किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
कई निजी एजेंसियों के कर्मचारी भी जांच के दायरे में
मंदिर परिसर में ट्रस्ट के प्रत्यक्ष कर्मचारियों के अलावा कई निजी एजेंसियों के माध्यम से भी बड़ी संख्या में कर्मी तैनात हैं। जानकारी के अनुसार SIS और BPIS एजेंसियों के पास सुरक्षा, लॉकर प्रबंधन और अन्य सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी है। BBG एजेंसी सफाई व्यवस्था का संचालन करती है। Uni Point सहित अन्य एजेंसियां भी विभिन्न सेवाओं के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए एक निजी फर्म के माध्यम से भी सेवाएं संचालित की जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन एजेंसियों के कुछ कर्मचारियों की आवश्यकता, नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जा रही है।
व्यवस्थाओं में सुधार के लिए हो सकती हैं सिफारिशें
बताया जा रहा है कि एसआईटी केवल चोरी के मामले की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी सुझाव दे सकती है। समीक्षा के दौरान ऐसे पदों और कर्मचारियों की पहचान की जा रही है, जिनकी उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं या जिनकी आवश्यकता कम बताई जा रही है। यदि समीक्षा में ऐसे पद अनावश्यक पाए जाते हैं, तो ट्रस्ट प्रशासन उनके पुनर्गठन या सेवा समाप्ति पर निर्णय ले सकता है।
ट्रस्ट ने शुरू की आंतरिक समीक्षा
इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी विभिन्न व्यवस्थाओं की आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी है। आज सुबह ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने यात्री सेवा केंद्र का औचक निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान संबंधित प्रभारी मौके पर मौजूद नहीं मिले। वहीं व्हीलचेयर संचालन से जुड़े कर्मचारियों ने भी व्यवस्था में सुधार से जुड़े कई सुझाव ट्रस्टी के सामने रखे।
खर्चों की भी हो रही समीक्षा
निरीक्षण के दौरान व्हीलचेयर रखरखाव से जुड़े खर्चों को लेकर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों ने बताया कि व्हीलचेयर मरम्मत के लिए निजी एजेंसी को अनुबंध दिया गया है, जबकि अधिकांश समय ऐसी सेवाओं की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है। इस पर ट्रस्टी ने खर्चों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही। इसके अलावा यात्री सेवा केंद्र के रिसेप्शन काउंटर और अन्य सुविधाओं के रखरखाव को लेकर भी निर्देश दिए गए। ट्रस्टी ने आवश्यक मरम्मत और संसाधनों की सूची उपलब्ध कराने को कहा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट पर निर्भर
फिलहाल, पूरे मामले में एसआईटी की जांच जारी है। ट्रस्ट और प्रशासन दोनों स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। किन कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी, किसकी सेवाएं जारी रहेंगी और किनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी, इसका अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट द्वारा लिए जाने वाले प्रशासनिक फैसलों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।