
रायपुर | छत्तीसगढ़ के इकलौते दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। शिक्षा के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए परिसर में तैयार किया गया आधुनिक शैक्षणिक डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट अगस्त तक शुरू करने का दावा किया जा रहा है। भवन निर्माण पूरा होने के छह साल बाद अब जाकर छात्रों को इसका लाभ मिल सकेगा। इसके शुरू होने से विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें दूध प्रसंस्करण, पैकेजिंग और गुणवत्ता परीक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा।
आणंद और करनाल की तर्ज पर संचालन की योजना, दो मॉडल पर विचार
महाविद्यालय प्रबंधन इस प्लांट को गुजरात के आणंद कृषि विश्वविद्यालय स्थित विद्या डेयरी और हरियाणा के करनाल मॉडल डेयरी प्लांट की तर्ज पर संचालित करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इसके लिए मुख्य रूप से दो तरह के मॉडल पर विचार किया जा रहा है:
पहला मॉडल: छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के माध्यम से कच्चे दूध की आपूर्ति की जाएगी। देवभोग के जरिए प्रतिदिन करीब 10 हजार लीटर दूध का प्रसंस्करण किया जाएगा। इस दूध से पनीर, दही, मक्खन, घी, फ्लेवर्ड मिल्क और आइसक्रीम जैसे दुग्ध उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इन सभी उत्पादों की बिक्री के लिए महाविद्यालय परिसर के पास एक डेयरी पार्लर खोलने की भी योजना है।
दूसरा मॉडल: इस प्लांट का संचालन किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को देने पर भी विचार चल रहा है। इससे छात्रों को उद्योग स्तर पर उत्पादन प्रक्रिया, मशीन संचालन, कार्यप्रणाली और व्यावसायिक प्रबंधन का अनुभव मिलेगा।
लर्निंग विद अर्निंग और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
महाविद्यालय में अभी बीटेक डेयरी टेक्नोलॉजी की 50 सीटें हैं। इसके अलावा एमटेक में छह शाखाएं संचालित हैं, जिनमें कुल 24 सीटें हैं। प्लांट शुरू होने से इन छात्रों को 'लर्निंग विद अर्निंग' की अवधारणा समझने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के दौरान वे उत्पादन प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अनुभव प्राप्त करेंगे। प्रबंधन भविष्य में इस प्लांट को स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित करना चाहता है, जहां विद्यार्थी अपने उत्पाद और खुद का बिजनेस मॉडल तैयार कर सकेंगे। स्थानीय डेयरी उद्यमियों और दुग्ध उत्पादकों को भी तकनीकी सहयोग मिलने की उम्मीद है।
काम में देरी की वजह: कोरोना और फंड की कमी
इस प्लांट के भवन निर्माण के लिए वर्ष 2017-18 में शासन से 1 करोड़ 87 लाख रुपए की स्वीकृति मिली थी। 2019 में बिल्डिंग बनी और करीब 3 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में अधिकांश मशीनें स्थापित की गईं। योजना के अनुसार इसे 2020 में शुरू होना था, लेकिन वाल्व, रेफ्रिजरेशन सिस्टम और कोल्ड स्टोरेज के उपकरण जैसे बुनियादी काम पूरे नहीं हो पाए। फिर कोरोना काल के कारण काम रुक गया। 2023 में दोबारा प्रयास किया गया, लेकिन तब तक स्वीकृत फंड खत्म हो चुका था। महंगाई और मशीनों के बाजार मूल्य में बढ़ोतरी ने भी देरी बढ़ाई। अंततः वर्ष 2025 में मंडी बोर्ड से करीब 44 लाख रुपए की राशि मिलने के बाद लंबित कार्य एचएमटी के माध्यम से कराए जा रहे हैं। बिजली कनेक्शन के लिए भी 16 लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं।
98 प्रतिशत काम पूरा
प्लांट का करीब 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष कार्यों को पूरा कर अगस्त के अंत तक इसे शुरू करने की तैयारी की जा रही है। प्लांट शुरू होने से विद्यार्थियों को डेयरी प्रोसेसिंग और उत्पादन प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा।
सुधीर उपरित, डीन, दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, रायपुर