रायपुर। गरीबों और राशन कार्डधारकों को रियायती दर पर मिलने वाले सरकारी चावल के वितरण में गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। रायपुर में की गई पड़ताल के दौरान राशन दुकानों से चावल की बोरियां वाहनों में लोड कर राइस मिल तक ले जाने के दृश्य सामने आए। वहीं, कुछ दुकानों में हितग्राहियों को चावल देने के बजाय नकद राशि दिए जाने की शिकायतें भी मिलीं। मामले की प्रशासनिक जांच में तीन दुकानों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 10 हजार किलो से अधिक का अंतर पाया गया।

पड़ताल में राशन वितरण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए हैं। कहीं ऑनलाइन रिकॉर्ड में चावल दर्ज होने के बावजूद गोदाम खाली मिले, तो कहीं हितग्राही राशन के इंतजार में खड़े नजर आए। स्थानीय स्तर पर सामने आए इन मामलों के बाद प्रशासन ने स्टॉक का मिलान कराया और संबंधित समूह के खिलाफ प्रकरण तैयार किया। हालांकि, चावल की कमी या अधिकता के पीछे की वजह और कथित हेराफेरी में किसकी भूमिका है, यह जांच का विषय है।

रिकॉर्ड और गोदाम के चावल में बड़ा अंतर, जांच के बाद कार्रवाई
मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने एसडीएम नंदकुमार और तहसीलदार की टीम को राशन दुकानों के स्टॉक की जांच के लिए भेजा। टीम ने दुकानों में दर्ज ऑनलाइन और दस्तावेजी रिकॉर्ड का मौके पर उपलब्ध चावल से मिलान किया। जांच के दौरान तीन दुकानों में कुल 10 हजार किलो से अधिक का अंतर सामने आया। इसके बाद संबंधित समूह के खिलाफ प्रकरण बनाया गया। यह अंतर सरकारी राशन के भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि स्टॉक में कमी या अधिकता किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

केस-1: राशन दुकान से चावल की बोरियां राइस मिल तक पहुंचीं
दलदल सिवनी स्थित राशन दुकान क्रमांक 441001059 में चावल की बोरियां एक वाहन में लोड किए जाने का मामला सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, बोरियों को तिरपाल से ढककर वाहन रवाना हुआ। वाहन साइंस सेंटर के सामने से होते हुए विधानसभा रोड स्थित एक राइस मिल पहुंचा। रास्ते में कुछ बोरियां दूसरे ऑटो में उतारे जाने की बात भी सामने आई। राइस मिल के प्रवेश द्वार पर चावल का वजन किए जाने के बाद उसे परिसर के भीतर ले जाया गया और दरवाजा बंद कर दिया गया।

इस घटनाक्रम ने सरकारी राशन के चावल के परिवहन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आखिर राशन दुकान से निकली बोरियां राइस मिल तक किस उद्देश्य से पहुंचीं? क्या यह परिवहन किसी अधिकृत प्रक्रिया का हिस्सा था या नियमों का उल्लंघन हुआ? इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

केस-2: ऑनलाइन रिकॉर्ड में करीब 10 टन चावल, मोवा की दुकानों में गोदाम लगभग खाली
मोवा की राशन दुकान क्रमांक 1071 और 1171 में पड़ताल के दौरान रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर दिखाई दिया। दुकानों में हितग्राहियों की भीड़ मौजूद थी, लेकिन गोदाम में चावल लगभग नहीं था। संचालक की ओर से चावल जल्द आने की बात कही गई। वहीं, पीडीएस के ऑनलाइन रिकॉर्ड में दोनों दुकानों के नाम पर करीब 10 टन चावल दर्ज होने की जानकारी सामने आई। चावल की उपलब्धता को लेकर पूछताछ के दौरान सर्वर डाउन होने की बात भी कही गई। इसके बाद दुकान बंद किए जाने लगी और हितग्राहियों को वापस भेजा जाने लगा। रिकॉर्ड में चावल दर्ज होने के बावजूद गोदाम लगभग खाली मिलने से स्टॉक की वास्तविक स्थिति और वितरण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

केस-3: पंडरी तराई में राशन के इंतजार में हितग्राही, दुकान के अंदर चावल नहीं
मधु पिल्ले स्कूल परिसर स्थित पंडरी तराई की राशन दुकान में भी स्थिति चिंताजनक बताई गई। दुकान के बाहर करीब 20 से 25 हितग्राही राशन लेने के इंतजार में खड़े थे। अंदर तौल मशीन तो मौजूद थी, लेकिन चावल की एक भी बोरी नहीं मिली। ऑनलाइन रिकॉर्ड के मुताबिक, दुकान में करीब 4,200 किलो चावल होना चाहिए था। ऐसे में रिकॉर्ड में दर्ज अनाज और मौके पर उपलब्ध स्टॉक के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे।

कुछ हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि उन्हें चावल देने के बजाय पैसे दिए जाते हैं। उनका कहना था कि राशन पाने के लिए बार-बार परेशान किए जाने के कारण वे नकद राशि लेकर बाहर से अनाज खरीदने को मजबूर होते हैं। खाद्य नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि सरकारी राशन के चावल की खरीद-बिक्री नियमों के खिलाफ है।

केस-4: दलदल सिवनी की दुकान में रिकॉर्ड से ज्यादा चावल, नकद भुगतान के भी आरोप
दलदल सिवनी में सतनाम भवन के पास स्थित एक अन्य राशन दुकान में रिकॉर्ड की तुलना में अधिक चावल मिलने की जानकारी सामने आई। यहां भी कुछ हितग्राहियों ने चावल के बदले नकद राशि मिलने की बात कही। हालांकि, दुकान संचालिका ने इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि पास की निलंबित राशन दुकान का स्टॉक भी इसी जगह रखा गया है और दोनों दुकानों के हितग्राहियों को यहीं से राशन दिया जा रहा है। दूसरी ओर, दुकान के बाहर मौजूद कुछ युवकों ने दावा किया कि यहां नियमित रूप से चावल के बदले पैसे मिलते हैं। उनके अनुसार, इसी वजह से वे राशन लेने के लिए झोला लेकर नहीं आए थे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

सरकारी राशन की बिक्री पर नियम सख्त, जांच के दायरे में वितरण व्यवस्था
सरकारी राशन का अनधिकृत तरीके से खरीदना-बेचना नियमों के विरुद्ध है। राशन दुकानों में स्टॉक का अंतर, गोदामों में चावल की अनुपलब्धता और हितग्राहियों की शिकायतों ने वितरण व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं।

अब प्रशासनिक जांच में यह सामने आना अहम होगा कि चावल के स्टॉक में अंतर कैसे आया, राशन दुकानों से अनाज के कथित परिवहन का उद्देश्य क्या था और हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में राशन क्यों नहीं मिल रहा था। जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।