नई दिल्ली। देश के कई बड़े शहरों में काम करने वाले लाखों सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले संभावित बदलाव के तहत इन-हैंड सैलरी में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे कर्मचारियों की टैक्स बचत भी बढ़ेगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों को मेट्रो शहरों की श्रेणी में शामिल करने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर ज्यादा टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।
हालांकि मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को बेसिक सैलरी और डीए के 50% तक HRA छूट मिलती है, जबकि नॉन-मेट्रो शहरों के लिए यह सीमा 40% है। नए बदलाव के बाद इन चार शहरों के कर्मचारियों को भी 50% तक की छूट मिल सकेगी, जिससे उनकी टैक्सेबल इनकम घटेगी। इस फैसले का सबसे अधिक फायदा उन कर्मचारियों को होगा जिनकी सैलरी स्ट्रक्चर में HRA का हिस्सा बड़ा है और जो किराए के मकानों में रहते हैं। बढ़ती रेंट कॉस्ट के बीच यह राहत उनके मासिक बजट को संतुलित करने में मदद करेगी।
हालांकि यह लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) का चयन करते हैं। नई टैक्स व्यवस्था में HRA छूट का प्रावधान नहीं है, इसलिए कर्मचारियों को अपने टैक्स प्लानिंग के अनुसार विकल्प चुनना होगा। सरकार ने इसके साथ ही रिपोर्टिंग और डॉक्यूमेंटेशन के नियमों को भी सख्त करने का संकेत दिया है। यदि किसी कर्मचारी का सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक है, तो मकान मालिक का PAN नंबर देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा अब केवल किराया रसीदें ही नहीं, बल्कि बैंक ट्रांजैक्शन या डिजिटल पेमेंट के प्रमाण भी सुरक्षित रखना जरूरी होगा। इससे फर्जी क्लेम्स पर रोक लगेगी और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शहरी क्षेत्रों में रहने वाले मध्यम और उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों को सीधा लाभ पहुंचाएगा और उनकी इन-हैंड सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कुल मिलाकर, यह संभावित बदलाव न केवल टैक्स बचत को बढ़ावा देगा, बल्कि बढ़ती महंगाई और किराए के बोझ के बीच कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने वाला कदम साबित हो सकता है।





