
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब नीति घोटाले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने आज उनसे जुड़े दो आपराधिक मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में जमानत मंजूर कर दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि मामले के कई अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें निर्धारित शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि निरंजन दास पर राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाने और कथित तौर पर कुछ आरोपियों को फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। अदालत को बताया गया कि उन्हें सितंबर और दिसंबर 2025 में अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए वही शर्तें लागू कीं जो पहले अन्य आरोपियों पर लगाई गई थीं। इसके तहत दास को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा और केवल जांच या अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए ही राज्य में प्रवेश की अनुमति होगी।
इससे पहले इसी मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी राहत मिल चुकी है। ऐसे में अब शराब नीति घोटाले में गिरफ्तार कई बड़े नाम जमानत पर बाहर आ चुके हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला राज्य की पिछली सरकार की आबकारी नीति और कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। वहीं जांच एजेंसियां अब भी इस पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच में जुटी हुई हैं।