
धमतरी। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच धमतरी जिले में ACB की एक बड़ी कार्रवाई ने सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिंचाई विभाग से जुड़े एक कर्मचारी को कथित तौर पर एक लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। घटना के बाद विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सरकारी कामों के लिए रिश्वत की मांग कब तक जारी रहेगी।
जानकारी के मुताबिक, एसीबी ने सिंचाई विभाग से जुड़े कर्मचारी लखेश्वर साहू को अपने कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू की है। कार्रवाई के बाद धमतरी स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस को जांच का केंद्र बनाया गया, जहां अधिकारियों की टीम पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी कर्मचारी पर किसी कार्य को कराने के बदले एक लाख रुपये लेने का आरोप है। हालांकि जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या सरकारी विभागों में आम लोगों के काम बिना रिश्वत के नहीं हो पा रहे हैं? यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं बल्कि व्यवस्था में मौजूद खामियों की ओर भी संकेत माना जा सकता है।
सरकारी विभागों को लेकर अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि फाइलों को आगे बढ़ाने, स्वीकृति दिलाने या विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कथित रूप से अवैध रकम की मांग की जाती है। ऐसे में एसीबी की यह कार्रवाई उन शिकायतों को भी चर्चा के केंद्र में ले आई है, जो वर्षों से लोगों के बीच सुनाई देती रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय-समय पर कड़ी निगरानी और जवाबदेही तय की जाए तो ऐसे मामलों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
कार्रवाई की खबर सामने आते ही विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कथित रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई थी और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एसीबी की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला व्यक्तिगत स्तर का था या फिर किसी बड़े नेटवर्क अथवा प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। फिलहाल, एसीबी की टीम आरोपी कर्मचारी से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।