World Health Organization के अनुसार भारत में करोड़ों लोग आज भी किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिगरेट छोड़ना सिर्फ इच्छाशक्ति का मामला नहीं, बल्कि यह एक गंभीर निकोटीन एडिक्शन से जुड़ी मेडिकल स्थिति भी है। यही वजह है कि कई लोग बार-बार कोशिश करने के बावजूद कुछ समय बाद फिर से स्मोकिंग शुरू कर देते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, निकोटीन शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित करता है। जब कोई व्यक्ति अचानक सिगरेट छोड़ता है, तो उसे कई तरह के withdrawal symptoms का सामना करना पड़ सकता है। इनमें बेचैनी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, नींद की समस्या, ध्यान लगाने में कठिनाई और बार-बार सिगरेट पीने की इच्छा शामिल होती है। यही कारण है कि ज्यादातर लोग लंबे समय तक स्मोकिंग छोड़ने में सफल नहीं हो पाते।

डॉक्टरों का कहना है कि लोगों के बीच एक बड़ी गलतफहमी यह भी है कि सिगरेट से होने वाली हर बीमारी की वजह सिर्फ निकोटीन है। जबकि वैज्ञानिक रिसर्च बताती हैं कि असली नुकसान तंबाकू जलने पर निकलने वाले जहरीले धुएं और केमिकल्स से होता है। निकोटीन मुख्य रूप से लत पैदा करता है, लेकिन शरीर को गंभीर नुकसान धूम्रपान की प्रक्रिया से पहुंचता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनियाभर में Nicotine Replacement Therapy यानी NRT को स्मोकिंग छोड़ने में मददगार माना जाता है। निकोटीन गम, लोजेंजेस और अन्य सपोर्टिव थेरेपी craving और withdrawal symptoms को कम करने में मदद कर सकती हैं। कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज में पाया गया है कि सही सपोर्ट और थेरेपी के साथ स्मोकिंग छोड़ने की सफलता दर काफी बेहतर हो सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार, आज स्मोकिंग सिर्फ कैंसर या भविष्य की बीमारी का खतरा नहीं रह गई है, बल्कि यह युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर रही है। कम स्टेमिना, जल्दी थकान, खराब नींद, सांस फूलना और कमजोर फिटनेस जैसी समस्याएं अब कम उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही हैं।

हर साल 31 मई को World No Tobacco Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू और धूम्रपान के खतरों के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी, मेडिकल सपोर्ट और मजबूत इरादे के साथ स्मोकिंग की लत से बाहर निकला जा सकता है।