
सूरजपुर जिले के ओड़गी इलाके में करोड़ों रुपये की लागत से बना लांजित स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गया है। इस शानदार इमारत में रात के समय मरीजों को इलाज की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। ताजा मामला मंगलवार रात का है जब एक गर्भवती महिला भारी प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन ड्यूटी से गायब स्टाफ के कारण उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका। स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर तो मौजूद थे लेकिन डिलीवरी कराने के लिए सबसे जरूरी नर्सिंग स्टाफ वहां से गायब था। इस पूरी घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे लांजित ग्राम पंचायत की एक गर्भवती महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे आनन फानन में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। अस्पताल प्रभारी ने ड्यूटी पर तैनात संबंधित स्टाफ को फोन कर तुरंत अस्पताल आने को कहा। परिजनों ने भी कई बार फोन लगाकर मिन्नतें की लेकिन कोई भी स्वास्थ्य कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। गर्भवती महिला करीब एक घंटे तक अस्पताल में दर्द से तड़पती रही। अंत में मरीज की हालत बिगड़ती देख सरपंच और ग्रामीणों की मदद से महिला को रात में ही ओड़गी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर किया गया। गनीमत रही कि वहां पहुंचने पर उसका सुरक्षित प्रसव कराया जा सका और जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
लांजित के सरपंच धरम सिंह आयम और स्थानीय ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही को लेकर भारी गुस्सा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है जब अस्पताल में स्टाफ गायब मिला हो। इससे पहले भी नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते एक गर्भवती महिला को रात में ओड़गी भेजना पड़ा था और रास्ते में सड़क पर ही उसका प्रसव हो गया था। लोगों का सीधा सवाल है कि जब सरकार ने करोड़ों खर्च कर गांव में बड़ा अस्पताल बना दिया है तो वहां चौबीसों घंटे नियमित स्टाफ क्यों नहीं रहता। रात के समय ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर ग्रामीण महिलाओं की जान से बड़ा खिलवाड़ है।
इस गंभीर मामले के सामने आने और ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। ओड़गी के खंड चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजय चौहान ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही वह खुद पूरी जांच के लिए गांव पहुंचे थे। उन्होंने काम में लापरवाही बरतने वाले सभी संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इन सभी कर्मचारियों से दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। बीएमओ ने साफ तौर पर कहा है कि पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।