
रायपुर। ईडी और ईओडब्ल्यू की लगातार हो रही कार्रवाई के बाद भी आबकारी विभाग की सरकारी शराब दुकानों में ओवर रेटिंग का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब सरेआम खपाई जा रही है। लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए आबकारी विभाग ने अभनपुर की देशी शराब दुकान में एक डमी ग्राहक बनाकर भेजा। यहां डमी ग्राहक को 1800 रुपए की शराब की बोतल 2000 रुपए में बेची गई।
ओवररेटिंग रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद विभाग ने वहां पदस्थ आबकारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस अवैध कमाई की रकम नीचे से लेकर ऊपर तक पहुंचने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। इसी आधार पर रायपुर के सहायक आबकारी आयुक्त डॉ. प्रवीण वर्मा और अभनपुर मंडल प्रभारी व एडीईओ डीडी पटेल को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
पिछली सरकार में भी सामने आया था घोटाला
सरकारी शराब दुकानों में ओवर रेटिंग कोई नई बात नहीं है। पिछली सरकार के कार्यकाल में भी इसी मामले में बड़ा घोटाला सामने आ चुका है। इसके बावजूद दुकानों में एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की आदत नहीं जा रही है। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शराब तय कीमत से अधिक पर बेची जा रही है। इसी सूचना पर आबकारी विभाग ने कार्रवाई की रूपरेखा बनाई और अभनपुर दुकान में यह गड़बड़ी पकड़ी गई।
ईओडब्ल्यू के रडार पर अनवर ढेबर के ठिकाने
दूसरी ओर, आबकारी विभाग में हुए 182 करोड़ रुपए के ओवरटाइम घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू की टीम ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को टीम ने जेल में बंद शराब कारोबारी अनवर ढेबर के तीन ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। रायपुर, अभनपुर और धमतरी में तीन अलग-अलग टीमों ने पहुंचकर मकान तथा यार्ड की तलाशी ली। इस कार्रवाई के दौरान अनवर की कथित अवैध संपत्तियों के कई दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि अनवर ढेबर ने घोटाले की रकम को दूसरे लोगों के नाम पर निवेश किया है।
अब तक 1200 करोड़ की संपत्तियां अटैच
आबकारी विभाग में अलग-अलग मामलों को मिलाकर करीब 3200 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच चल रही है। इसमें 182 करोड़ रुपए का ओवरटाइम घोटाला और 300 करोड़ रुपए से अधिक का ओवररेटिंग घोटाला भी शामिल है। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसियों ने अब तक करीब 1200 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कर ली हैं। फिर भी, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और अनिल के करीब 200 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की जानकारी अब तक पूरी तरह से सामने नहीं आ सकी है। ईओडब्ल्यू की टीम लगातार छापे मारकर दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, ताकि अवैध संपत्तियों और दूसरे लोगों के नाम पर किए गए निवेश की पूरी जानकारी निकाली जा सके। एक तरफ हजारों करोड़ की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी स्तर पर 200 रुपए की ओवररेटिंग यह बताती है कि सिस्टम में बैठे लोगों में कार्रवाई का कोई खौफ नहीं है।