• विधानसभा में पेश आंकड़े: 3 साल में एससी-एसटी एक्ट के 2455 केस दर्ज, इनमें 1013 मामले रेप के।
  • राष्ट्रीय जगत विजन की पड़ताल में बड़ा खुलासा- सरकारी मुआवजे के लिए लिखवाई जा रही झूठी रिपोर्ट।
  • बिलासपुर के 17 करोड़ के सर्पदंश घोटाले की तरह ही रची जा रही खजाने में सेंध लगाने की साजिश।

बिलासपुर। बिलासपुर में सरकारी मुआवजे की राशि हड़पने के लिए एक के बाद एक नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। हाल ही में जिले के अंदर 17 करोड़ रुपये का सर्पदंश मुआवजा घोटाला सामने आया था। अब इसी तर्ज पर एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट का गलत इस्तेमाल कर सरकार से मिलने वाली सहायता राशि निकालने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय जगत विजन को मिली जानकारी के अनुसार, जिले में इस एक्ट का फायदा उठाकर जबरन या झूठी एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा रही है।

सीपत की महिला है सरगना, अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे सीपत इलाके की एक महिला अधिवक्ता मास्टरमाइंड का काम कर रही है। यह महिला ग्रामीण इलाकों की महिलाओं से झूठी शिकायतें दर्ज करवाती है। इसके बाद मुआवजे की राशि स्वीकृत कराकर उसका अपने स्तर पर उपयोग कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि अगर पूरे जिले के आंकड़े निकालकर गहराई से जांच की जाए, तो एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। सर्पदंश मामले की तरह ही इस खेल में भी एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और अन्य प्रशासनिक अमले की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

विधानसभा में पेश आंकड़े चौंकाने वाले

बीते 12 मार्च को विधानसभा में सरकार ने लिखित प्रश्नोत्तर के दौरान एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज अपराधों के आंकड़े पेश किए थे। 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों से मिले रिकॉर्ड के अनुसार 2455 केस दर्ज हुए हैं। इन आंकड़ों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की संख्या सबसे अधिक है। कुल मामलों में से करीब 41 प्रतिशत यानी 1013 केस सिर्फ रेप के हैं। यानी करीब-करीब हर तीन में से एक मामला रेप का बताया गया है। इसके अलावा हत्या के 73, मारपीट कर चोट पहुंचाने के 380, गंभीर चोट के 60 और अपहरण के 30 मामले दर्ज किए गए हैं।

सर्पदंश घोटाले जैसा ही है काम करने का तरीका

मुआवजा हड़पने का यह तरीका बिल्कुल बिलासपुर के हालिया सर्पदंश घोटाले जैसा ही है। उस मामले में भी 2021 से 2024 के बीच 431 सामान्य मौतों को सांप काटने से हुई मौत बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। उस प्रकरण में सिम्स की डॉक्टर, वकील, लिपिक और दलालों का पूरा रैकेट काम कर रहा था। तहसील कार्यालय के कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर चार-चार लाख रुपये बांटे गए। अब एससी-एसटी एक्ट के तहत भी झूठे मुकदमों का जाल बुनकर सरकारी राशि हड़पने का एक नया नेक्सस सामने आ रहा है।