रायपुर। छत्तीसगढ़ में विष्णु सरकार की 'जीरो टॉलरेंस और सुशासन की बातें सुनने में तो बहुत अच्छी लगती हैं, लेकिन सिस्टम के भीतर जो खिचड़ी पक रही है, उसकी महक अब मंत्रालय से बाहर आने लगी है। सिंचाई विभाग में हाल ही में हुई एक नियुक्ति ने मंत्रालयीन गलियारों से लेकर ठेकेदारों के ठिकानों तक एक नई चर्चा छेड़ दी है। इंजीनियर इन चीफ (ईएनसी) की कुर्सी पर नेताम जी विराजमान हो गए हैं। पर चर्चा यही है कि यह कुर्सी उनकी कार्यकुशलता का ईनाम नहीं, बल्कि लाइजनिंग का मीठा फल है।

इस पूरी ताजपोशी के पीछे एक बड़ी तगड़ी लॉबी ने पसीना बहाया है। अंदरखाने की खबर है कि एक विधायक, सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता के पीए और कुछ वजनदार ठेकेदारों ने मिलकर यह पूरी बिसात बिछाई। इस तिकड़ी की सेटिंग इतनी जबरदस्त थी कि सुशासन वाले कड़े रुख के बीच से भी नेताम जी के लिए कुर्सी का रास्ता निकाल ही लिया गया।

बिलासपुर का वो पुराना रिकॉर्ड

नेताम जी की इस नई जिम्मेदारी पर सवाल उठना तो लाजिमी है, क्योंकि उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड ही कुछ ऐसा है। जब वो बिलासपुर में पदस्थ थे, तो वहां के लोग बताते हैं कि साहब कभी भी लगातार एक सप्ताह तक अपने ऑफिस में नजर नहीं आए। बात सिर्फ कुर्सी पर बैठने की नहीं है, बल्कि उनके पूरे कार्यकाल में ऐसा कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट याद नहीं आता, जिस पर उन्होंने कोई कमाल दिखाया हो या पसीना बहाया हो।

अब मंत्रालय में लोग फब्तियां कस रहे हैं कि बिना किसी बड़े प्रोजेक्ट के अनुभव वाले अफसर के भरोसे क्या पूरा सिंचाई विभाग दौड़ पड़ेगा? या फिर असल में विभाग की कमान उन ठेकेदारों के हाथ में ही रहेगी, जिन्होंने इस लाइजनिंग में अपना पूरा जोर लगाया है?

 

उइके वाले आरोप और ठाकुर की एंट्री का सच

 

सिंचाई विभाग में ठेकेदारों का यह दबदबा कोई आज की बात नहीं है। याद कीजिए इन्द्रजीत उइके का कार्यकाल, उस वक्त भी ठीक ऐसे ही आरोप बाजार में सुर्खियां बटोर रहे थे। तब भी यही कहा जाता था कि विभाग में ठेकेदार ही सब तय करते हैं, अफसर तो बस फाइलें आगे बढ़ाते हैं।

इन्हीं विवादों और लगातार लग रहे आरोपों के चलते उइके जी को तीसरी बार एक्सटेंशन नहीं मिला और ठाकुर जी की नियुक्ति की गई। तब लगा था कि शायद अब ठेकेदारों का राज खत्म होगा। पर इस बार नेताम जी ने अपनी तगड़ी सेटिंग के दम पर बता दिया कि सिस्टम में जुगाड़ के आगे सब फेल है।

अब सुशासन पर उठ रहे प्रश्न....

यह पूरा मामला बताता है कि कैसे बड़े-बड़े दावों की आंखों में धूल झोंककर, नेता और ठेकेदारों के करीबी अपना काम बना लेते हैं। ऊपर बैठे लोगों को शायद लगता है कि सब कुछ नियम से चल रहा है, लेकिन नीचे पूरा खेल सेट हो जाता है और सरकार को खबर तक नहीं लगती कि उनके दावों को सिस्टम के भीतर से ही कैसे खोखला किया जा रहा है।

राष्ट्रीय जगत विजन करेगा खुलासा

इस लाइजनिंग के खेल में अभी कई राज दफन हैं। 'राष्ट्रीय जगत विजन' जल्द ही इस पूरे मामले की परतें खोलने जा रहा है। इस पूरी डील में कौन-कौन शामिल था, परदे के पीछे से गोटियां कौन सेट कर रहा था, और यह सेटिंग कितने में और किसके जरिए हुई, इन सभी बातों का कच्चा चिट्ठा जल्द सामने आएगा। कौन से विधायक और पीए इस खेल के असली खिलाड़ी हैं, इसकी पूरी जानकारी जल्द ही पाठकों के सामने होगी।