
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पंडरिया विकासखंड के ढोलढोली रपटे पर तेज बहाव के बीच 20 से 25 यात्रियों से भरी एक एसएमएल माजदा बीच धारा में फंस गई। वाहन में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे भी सवार थे। कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यात्रियों की जान पर बन आई। हालांकि आसपास मौजूद ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में वनांचल क्षेत्रों की सड़क और पुल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेज बहाव के बीच बीच रपटे में अटक गई माजदा
लगातार बारिश के कारण ढोलढोली रपटे पर पानी का बहाव काफी तेज था। इसी दौरान यात्रियों से भरी एसएमएल माजदा वाहन रपटा पार करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन बीच धारा में पहुंचते ही वाहन पानी के तेज बहाव में फंस गया और आगे बढ़ना बंद हो गया। वाहन रुकते ही उसमें बैठे यात्रियों में दहशत फैल गई। महिलाएं और बच्चे घबरा गए, जबकि बुजुर्ग यात्रियों में भी डर का माहौल बन गया। देखते ही देखते आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी।
ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंच गए। तेज बहाव और जोखिम के बावजूद उन्होंने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे का सहारा लेकर बीच धारा तक पहुंचने की कोशिश की और काफी मशक्कत के बाद यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। स्थानीय लोगों की तत्परता और साहस के कारण सभी यात्रियों को सुरक्षित किनारे लाया गया। यदि समय पर ग्रामीण मौके पर नहीं पहुंचते, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी थे सवार
बताया जा रहा है कि वाहन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी मौजूद थे। तेज बहाव के कारण वाहन के भीतर बैठे लोगों में भय का माहौल था। कई यात्रियों ने किसी तरह खुद को संभाले रखा, जबकि ग्रामीण लगातार उन्हें हिम्मत बंधाते रहे। सभी यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
हर साल बनती है ऐसी स्थिति
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, ढोलढोली रपटा छिंदीडीह, सारपानी, भाकुर, पीपरटोला, सेंदुरखार और देवान पटपर सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी, किसान और व्यापारी इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं। लेकिन हर वर्ष मानसून में रपटे के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। कई बार छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, फिर भी अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।
वर्षों से पुल की मांग, नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां ऊंचे पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि बारिश के दिनों में आवागमन सुरक्षित रह सके। उनका आरोप है कि हर साल समस्या दोहराई जाती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर मामला टाल देता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण कर दिया गया होता, तो यात्रियों को इस तरह जान जोखिम में डालकर उफनते रपटे से गुजरने की नौबत नहीं आती।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि बरसात के मौसम में ऐसे संवेदनशील रपटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएं। साथ ही चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और पुलिस या प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि लोग उफनते रपटे को पार करने का जोखिम न उठाएं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि ढोलढोली रपटे पर जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और लोगों की जान सुरक्षित रह सके।