नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संयम और जिम्मेदारी दिखाने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय केवल सरकारों के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए आर्थिक अनुशासन का दौर है। उन्होंने लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने, ईंधन की खपत कम करने और घरेलू संसाधनों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने साफ कहा कि “देशभक्ति केवल सीमा पर बलिदान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन समय में जिम्मेदारी से जीवन जीना भी राष्ट्रसेवा है।”

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने, गैरजरूरी विदेश यात्राएं कम करने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बन गया है। पीएम मोदी ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट, मेट्रो, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि आयातित ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कंपनियों और कर्मचारियों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ मॉडल को फिर से प्राथमिकता देने का सुझाव दिया, जिससे ट्रैफिक और ईंधन खर्च दोनों में कमी लाई जा सके। उन्होंने भारतीय परिवारों से अपील की कि विदेशों में शादियां या छुट्टियां मनाने की बजाय देश के भीतर ही आयोजन करें। सरकार का मानना है कि यदि नागरिक सामूहिक रूप से छोटी-छोटी आर्थिक आदतों में बदलाव लाते हैं, तो भारत वैश्विक आर्थिक दबावों के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रख सकता है।