
कवर्धा : छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पोलमी में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के एक व्याख्याता (एलबी) को लेकर विवाद गहरा गया है। व्याख्याता पर छात्राओं को बहला-फुसलाकर संबंध बनाने और धर्मांतरण कराने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। आरोपित व्याख्याता की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। मंगलवार सुबह से टेंट लगाकर सड़क पर ट्रैक्टर खड़े किए गए और चक्काजाम कर विरोध जताया गया। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विभागीय जांच रिपोर्ट आरोप सही, डीपीआई से निलंबन की सिफारिश
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 13 अक्टूबर को जारी पत्र के मुताबिक, ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति तथा ग्रामीणों ने व्याख्याता के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने विभागीय जांच के निर्देश दिए और जांच अधिकारी नियुक्त किया। विभागीय जांच रिपोर्ट में शिकायतों को सही पाते हुए व्याख्याता को प्रथम दृष्टया दोषी बताया गया है। इसके आधार पर डीईओ ने निलंबन की सिफारिश करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को पत्र भेजा है। साथ ही व्याख्याता को फिलहाल डीईओ कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है।
कार्यालय में अटैचमेंट, प्रदर्शनकारी असंतुष्ट
विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि व्याख्याता को स्कूल से हटाकर डीईओ कार्यालय में संलग्न कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। जब तक बर्खास्तगी और गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने मामले में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग उठाई है।
प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मंगलवार सुबह करीब 9 बजे प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर धरना शुरू किया और सड़क पर ट्रैक्टर खड़े कर चक्काजाम कर दिया। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार पूजा सिंह और विकासखंड शिक्षा अधिकारी दीपक ठाकुर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
गंभीर आरोपों से गरमाया मामला
व्याख्याता पर लगाए गए आरोपों ने मामले को संवेदनशील बना दिया है। ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को बहला-फुसलाकर संबंध बनाए गए और धर्मांतरण के प्रयास किए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। फिलहाल विभागीय स्तर पर निलंबन की सिफारिश की जा चुकी है, लेकिन आंदोलनकारी इसे अंतिम कार्रवाई मानने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांग है कि आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए और व्याख्याता को सेवा से बर्खास्त किया जाए।
