बिलासपुर में 331 मीटर लंबी टनल में सिग्नल समस्या को खत्म करने के लिए रेलवे ने नई तकनीक का प्रयोग किया है। यह तकनीक न केवल सिग्नलिंग सिस्टम को बेहतर बनाती है बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है। इस तकनीक का उपयोग करने से अब टनल के अंदर भी जीरो गैप कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे हादसों का जोखिम कम होगा।
बिलासपुर रेल मंडल के भनवारटंक स्टेशन की यह टनल 100 साल पुरानी है। यह टनल ब्रिटिश शासन के दौरान बनाई गई थी और इसकी गहराई 115 फीट है। इस टनल में हमेशा सिग्नल की समस्याएं आती रहती थीं, जिससे ट्रेनों के संचालन में बाधा उत्पन्न होती थी। SECR ने अब इस टनल में आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम को सफलतापूर्वक स्थापित किया है।
कैसे हुई सिग्नल समस्या
रेलवे ने इस टनल के अंदर नई तकनीक को स्थापित करने के लिए लीकी केबल और ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग किया है। इनकी मदद से रेडियो तरंगें सुरंग के अंत तक पहुंचाई जा सकेंगी। मास्टर यूनिट और रिमोट यूनिट्स लगाकर सिग्नल को नियंत्रित किया जाएगा। इससे न केवल परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
यह तकनीक पिछले महीने ही स्थापित की गई थी। रेलवे के जीएम तरूण प्रकाश के मार्गदर्शन में इस प्रणाली को लागू किया गया है। अब इस टनल में ट्रेनों को 10 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से निकाला जा सकेगा, जिससे हादसों का खतरा कम होगा।
सिग्नल समस्या का जिम्मेदार कौन
इस तकनीकी सुधार का श्रेय SECR को जाता है। रेलवे के अधिकारियों ने इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Zila Collector Ajay Singh ne is baare mein bataya ki yeh ek badi safalta hai jo rail suraksha ke liye khas hai.
प्रशासन क्या कह रहा है
SECR के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली सुरक्षित और स्मार्ट रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब पहाड़ों के बीच भी भरपूर सिग्नल मिलेगा और आपात स्थिति में संपर्क साधना आसान होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तकनीक उन्हें बहुत राहत देगी। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "पहले हम हमेशा इस टनल में सिग्नल की समस्या के कारण चिंतित रहते थे। अब हमें उम्मीद है कि हमारी यात्रा सुरक्षित होगी।"



