रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित “नक्सलवाद पर विजय” कार्यक्रम में डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने राज्य में सुरक्षा स्थिति को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक है और लंबे समय से चले आ रहे नक्सलवाद पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया गया है। रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में विजय शर्मा ने कहा कि दशकों से जारी संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। उनके अनुसार, राज्य में सक्रिय सशक्त नक्सल कैडर का प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो चुका है और बस्तर क्षेत्र में शांति का माहौल बना है।
गृहमंत्री ने सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चलाए गए लगातार ऑपरेशन, खुफिया समन्वय और स्थानीय स्तर पर विश्वास निर्माण की रणनीति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सुरक्षा जवानों के साहस और समर्पण को इस सफलता का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संवाद और पुनर्वास नीति को भी समान महत्व दिया गया। सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सम्मानजनक पुनर्वास के अवसर प्रदान किए, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला।
कार्यक्रम में विजय शर्मा ने बताया कि हजारों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाया है। इस प्रक्रिया को केवल “सरेंडर” नहीं बल्कि “सम्मानजनक वापसी” के रूप में देखा गया, जिससे लोगों में विश्वास बढ़ा। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में बदलते हालात का जिक्र करते हुए कहा कि अब वहां सांस्कृतिक और खेल गतिविधियां जैसे बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक आयोजित हो रहे हैं, जो शांति और विकास के संकेत हैं।
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा अभियानों को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत अब सामने है और स्थानीय जनता ने विकास और शांति के रास्ते को चुना है। गृहमंत्री ने यह भी माना कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए स्थानीय भाषा, बोली और मीडिया की भूमिका बेहद अहम रही। इसमें स्थानीय पत्रकारों और समुदायों का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।
कार्यक्रम के दौरान नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई, जिसमें बीते वर्षों की चुनौतियों और वर्तमान बदलाव को दिखाया गया। कुल मिलाकर, राज्य सरकार इस उपलब्धि को सुरक्षा, विकास और सामाजिक भागीदारी के संयुक्त प्रयास का परिणाम मान रही है, जबकि आगे भी शांति बनाए रखने के लिए सतर्कता और निरंतर प्रयास जारी रखने की बात कही गई।



