रतलाम। नई ई-स्कूटी खरीदने के महज 10 दिन बाद एक परिवार के लिए वही वाहन आधी रात के बाद मुसीबत का कारण बन गया। रतलाम की विंध्यावासिनी कॉलोनी में आज तड़के करीब 4 बजे घर के अंदर खड़ी ई-स्कूटी में अचानक धमाके के साथ आग लग गई। देखते ही देखते आग ने कमरे को अपनी चपेट में ले लिया और फिर घर के दूसरे हिस्सों तक फैल गई। हादसे में कमरे में सो रही 36 वर्षीय बिंदुकुंवर और उनकी 16 वर्षीय बेटी अंतिम गंभीर रूप से झुलस गईं। दोनों को जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। वहीं बड़ी बेटी विजय लक्ष्मी इस हादसे में बाल-बाल बचीं।

सुबह-सुबह धमाके की आवाज से खुली नींद
परिवार की बड़ी बेटी विजय लक्ष्मी के मुताबिक, आज सुबह करीब 4 बजे उनकी नींद खुली। कमरे में नजर पड़ते ही उन्होंने देखा कि ई-स्कूटी आग की लपटों से घिरी हुई थी। घर में गैस सिलेंडर भी रखे हुए थे। हालात को देखते हुए विजय लक्ष्मी ने सबसे पहले पीछे रखी गैस टंकी का बटन बंद किया। इसके बाद उन्होंने बाहर निकलने का रास्ता तलाशा।

दरवाजा नहीं खुला तो छत बनी बाहर निकलने की राह 
हादसे के वक्त घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। परिवार के पास मौजूद चाबियों में से एक छोटी बेटी के पास थी, जबकि दूसरी मशीन पर रखी थी।अचानक लगी आग और धुएं के बीच छोटी बेटी चाबी लेकर दरवाजे तक नहीं पहुंच सकी। इसी दौरान आग तेजी से फैलने लगी। विजय लक्ष्मी के मुताबिक, उनकी मां छोटी बेटी को बचाने के लिए पीछे गईं। आग की चपेट में आने के बाद दोनों किसी तरह बाहर निकलीं। इसके बाद विजय लक्ष्मी ने दोनों का हाथ पकड़कर उन्हें छत तक पहुंचाया। वहां से पड़ोसी की छत के रास्ते परिवार घर से बाहर निकल सका।

चार्जिंग पर भी नहीं लगी थी ई-स्कूटी
हादसे को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ई-स्कूटी चार्जिंग पर नहीं थी तो उसमें आग आखिर लगी कैसे? परिवार के मुताबिक, सोने से पहले ई-स्कूटी का चार्जिंग प्लग निकाल दिया गया था। यानी घटना के समय वाहन चार्ज नहीं हो रहा था। हादसे के बाद पुलिस अब इसी बिंदु की जांच कर रही है कि आग की शुरुआत वाहन के किस हिस्से से हुई और धमाके की वजह क्या थी।

सिर्फ 10 दिन पहले खरीदी थी स्कूटी
परिवार के रिश्तेदार वीरेंद्र सिंह के अनुसार, ई-स्कूटी करीब 10 दिन पहले माणक चौक स्थित शोरूम से लगभग 85 हजार रुपये में खरीदी गई थी। घटना के बाद वाहन पूरी तरह जल गया और सिर्फ उसका लोहे का ढांचा बचा। आग इतनी तेज थी कि कमरे में रखा घरेलू सामान भी बुरी तरह जल गया। कूलर और पंखे तक पिघल गए।

गैस सिलेंडर समय पर निकाला, टला बड़ा हादसा
आग की जानकारी मिलते ही पड़ोसी भी मदद के लिए पहुंचे। घर में रखे गैस सिलेंडर को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद नगर निगम की दमकल टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। समय रहते गैस टंकी बाहर नहीं निकाली जाती तो आग और बड़ा रूप ले सकती थी।

एंबुलेंस नहीं पहुंचने का भी आरोप
हादसे के बाद पड़ोसियों ने एंबुलेंस सेवा को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई बार फोन करने के बावजूद करीब डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। आखिरकार घायलों को निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों को बाद में मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

पुलिस जांच में खुलेगा आग का कारण
दीनदयाल नगर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ई-स्कूटी में आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और धमाका किन परिस्थितियों में हुआ। वाहन के अवशेषों और घटनास्थल की जांच के साथ तकनीकी पहलुओं को भी देखा जा रहा है। सिर्फ 10 दिन पुरानी ई-स्कूटी में आधी रात को हुआ यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है, खासकर तब, जब परिवार का दावा है कि वाहन उस समय चार्जिंग पर भी नहीं था। अब पुलिस और तकनीकी जांच से ही साफ होगा कि आग की असली वजह क्या थी।