
बिलासपुर : अरपा नदी में लगातार पहुंच रहे सीवरेज और शहर की गंदगी को लेकर हाईकोर्ट ने अब सीधे सरकार और नगर निगम से जवाब मांग लिया है। बिलासपुर के 70 नालों से निकलने वाले गंदे पानी को क्या मौजूदा चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी तरह साफ कर सकते हैं? चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन से इसी सवाल का स्पष्ट जवाब शपथ पत्र के साथ मांगा है।
70 नाले... लेकिन एसटीपी कितने?
बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर में प्रतिदिन लगभग 72.20 एमएलडी सीवरेज निकलता है। यह पानी सीवरेज नेटवर्क और करीब 70 नालों के जरिए आगे पहुंचता है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि आखिर इन सभी नालों का सीवरेज वास्तव में एसटीपी तक पहुंच भी रहा है या नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने कहा है कि निगम क्षेत्र के सभी 70 नाले उपलब्ध 6 एसटीपी, जिसमें दो निर्माणाधीन प्लांट भी शामिल हैं, से कवर और कनेक्टेड हैं या नहीं।
कोर्ट ने पूछा- हर नाले का पानी कहां जा रहा?
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने यह भी जानना चाहा कि प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवरेज को प्रभावी तरीके से इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट किया जा रहा है या नहीं। यानी सिर्फ एसटीपी की क्षमता बताना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि नालों का गंदा पानी प्लांट तक पहुंच रहा है और ट्रीटमेंट के बाद ही अरपा में छोड़ा जा रहा है या नहीं।
78 एमएलडी क्षमता, लेकिन इस्तेमाल सिर्फ 43.90 एमएलडी
फिलहाल बिलासपुर में चार एसटीपी संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी बताई गई है। हालांकि इनका वास्तविक उपयोग करीब 43.90 एमएलडी ही हो रहा है। यही आंकड़ा अब कोर्ट के सवाल को और अहम बना रहा है कि जब शहर से रोजाना 72.20 एमएलडी सीवरेज निकल रहा है तो उसकी पूरी मात्रा का ट्रीटमेंट किस व्यवस्था से हो रहा है।
दो और एसटीपी बन रहे, क्षमता होगी 94 एमएलडी
शहर में 16-16 एमएलडी क्षमता वाले दो और एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इनमें से एक ट्रायल रन की प्रक्रिया में है, जबकि दूसरे के 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना बताई गई है। दोनों प्लांट चालू होने के बाद बिलासपुर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता 94 एमएलडी हो जाएगी। यह क्षमता वर्तमान अनुमानित 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पादन से ज्यादा होगी। लेकिन हाईकोर्ट का फोकस सिर्फ क्षमता पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि क्या शहर के हर नाले का गंदा पानी वास्तव में एसटीपी तक पहुंचकर ट्रीट हो रहा है?
मुख्य सचिव ने दिया जवाब, फिर भी मांगी गई स्पष्टता
कोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव विकासशील की ओर से शपथ पत्र पेश किया गया। इसमें बताया गया कि निर्माणाधीन सभी एसटीपी का काम पूरा होने वाला है। इसके बाद इन प्लांटों के जरिए कितने सीवरेज का प्रभावी उपचार हो रहा है, इसकी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद कोर्ट ने नए एफिडेविट के जरिए यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या सिर्फ चार मौजूदा एसटीपी 70 नालों के सीवरेज को संभालने के लिए पर्याप्त हैं।
17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को भी शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है। सरकार को एसटीपी की क्षमता, स्थान, निर्माण की समय-सीमा और उपचारित पानी को अरपा नदी में छोड़े जाने से पहले अपनाए जा रहे उपायों की जानकारी देनी होगी। मुख्य सचिव की ओर से पेश जवाब से संतुष्ट होने के बाद डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।
अब देखना होगा कि 94 एमएलडी की क्षमता तैयार होने के बाद भी क्या बिलासपुर के सभी 70 नालों का गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचेगा और अरपा में जाने से पहले पूरी तरह ट्रीट होगा? हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में इसका जवाब सामने आ सकता है।