खैरागढ़। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क अभी निर्माण के दौर में ही है, लेकिन इसके कुछ हिस्सों में डामर की शुरुआती परत उखड़ने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क के कई स्थानों पर डामर हटने के बाद गिट्टी दिखाई दे रही है और सतह भी असमान नजर आ रही है। मामले की शिकायत के बाद अब लोक निर्माण विभाग ने तकनीकी जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है।

अधूरी सड़क पर ही दिखने लगी टूट-फूट
राजनांदगांव से खैरागढ़ की तरफ आने वाले मार्ग के कुछ हिस्सों में सड़क की पहली डामर परत क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है। कई जगह सतह से डामर निकलने के कारण नीचे बिछी गिट्टी नजर आने लगी है। निर्माणाधीन सड़क की शुरुआती परत में इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों की नजर अब इस बात पर है कि अंतिम रूप मिलने से पहले सड़क की स्थिति को किस तरह सुधारा जाता है।

शिकायत में गुणवत्ता और अनियमितता के आरोप
मामला केवल सड़क के उखड़ने तक सीमित नहीं रहा है। सितंबर 2026 में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने राजनांदगांव-खैरागढ़ और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं को लेकर शिकायत की थी। शिकायत में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी। शिकायत के बाद अब विभाग ने मामले को तकनीकी परीक्षण के स्तर पर आगे बढ़ाया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

विभाग ने बारिश को बताया एक वजह
खैरागढ़ की उप अभियंता स्मारिका तिवारी के मुताबिक, सड़क पर अभी दो और परतें बिछाई जानी बाकी हैं। उनका कहना है कि पहली डामर परत के बाद हुई तेज बारिश और पानी के प्रभाव से कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ है। विभाग के अनुसार, जिन हिस्सों में परत खराब हुई है, वहां क्षतिग्रस्त सामग्री हटाकर दोबारा डामरीकरण किया जाएगा। अब तकनीकी जांच में यह भी देखा जाएगा कि सड़क की शुरुआती परत के खराब होने के पीछे मौसम संबंधी परिस्थितियां कितनी जिम्मेदार हैं और निर्माण प्रक्रिया का इसमें कितना योगदान रहा।WhatsApp-Image-2026-10-04-at-9.23.58-AM-768x1024.jpeg

PWD ने बनाई चार सदस्यीय जांच समिति
शिकायतों और सड़क की स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी ने 2 अक्टूबर 2026 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया। समिति को सड़क निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सड़क की विभिन्न परतों से लेकर इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण तकनीक तक की जांच शामिल है।

GSB से बिटुमिन तक, इन मानकों की होगी पड़ताल
जांच समिति सड़क के GSB, WMM, सबग्रेड और डामरीकरण की गुणवत्ता की जांच करेगी। इसके अलावा बिटुमिन की मात्रा, सड़क की निर्धारित मोटाई, घनत्व, ग्रेडेशन, लेवल और एग्रीगेट जैसे तकनीकी मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सिर्फ सड़क की मौजूदा स्थिति ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों और संबंधित कार्य एजेंसी की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

गड़बड़ी साबित हुई तो कार्रवाई के निर्देश
विभागीय आदेश में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान यदि गुणवत्ता में कमी, वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों के भुगतान को लेकर भी आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

उखड़ी सड़क वाले हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
डोंगरगांव-कुमरदा समेत जिन स्थानों पर सड़क की सतह उखड़ी हुई है, वहां तत्काल मरम्मत और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वाहन चालकों को खतरे की जानकारी देने के लिए चेतावनी संकेत लगाने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही गई है।

तीन दिन में सामने आ सकती है जांच की तस्वीर
चार सदस्यीय समिति को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क की पहली डामर परत खराब होने की वजह केवल तेज बारिश और पानी का असर थी या निर्माण में तकनीकी स्तर पर भी कोई कमी सामने आती है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। करीब 90 करोड़ रुपये की इस सड़क परियोजना को लेकर उठे सवालों ने निर्माण की गुणवत्ता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल, विभागीय जांच ही तय करेगी कि सड़क की मौजूदा स्थिति के पीछे वास्तविक वजह क्या रही ?