अंबिकापुर। शहर से लगे मानिक प्रकाशपुर और क्रांति प्रकाशपुर गांवों में वन अधिकार अधिनियम के तहत आदिवासी परिवारों को मिली पहाड़ी भूमि पर कथित अवैध खनन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज माफिया जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से पहाड़ियों की कटाई कर बड़े पैमाने पर पत्थर और मुरुम का उत्खनन कर रहे हैं। इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आदिवासी परिवारों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन से पहले आदिवासी परिवारों को जमीन समतल करने या खेती योग्य बनाने का झांसा दिया जाता है। इसके बाद पहाड़ियों की बड़े पैमाने पर खुदाई शुरू कर दी जाती है और निकाली गई खनिज सामग्री को बाहर भेजा जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि पहाड़ियों की कटाई के बाद जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना, पर्यावरण और वन अधिकार अधिनियम के तहत मिले आदिवासी अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

ग्रामीणों का दावा है कि मामले की शिकायत कई बार प्रशासन और खनिज विभाग से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, अवैध खनन पर तत्काल रोक और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।