रायगढ़। जिले में प्राइवेट अस्पतालों की कार्यप्रणाली लोगों में निरंतर संदेह पैदा कर रही है। आयुष्मान योजना के तहत जमकर मनमानी चल रही है। नियमानुसार देखा जाए तो किसी भी मरीज के भर्ती होने पर क्लेम ओपन किया जाता है। साथ ही डिस्चार्ज या रेफर करने के दौरान ही क्लेम को बंद करना होता है। लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में ऐसा नहीं हो रहा है। प्रबंधन की लापरवाही से रेफर मरीज जैसे ही दूसरे अस्पताल पहुंचते हैं, वे परेशान होते हैं।

पद्मावती अस्पताल की लापरवाही आई सामने

पिछले दिनों खरसिया के पद्मावती अस्पताल का मामला सामने आया। जुर्डा निवासी जगतराम उपचार के लिए वहां भर्ती हुआ। अस्पताल में उपचार के दौरान उसका आयुष्मान योजना के तहत क्लेम ओपन किया गया। कुछ दिनों बाद जगतराम को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ रेफर कर दिया गया।

मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचा, वहां उपचार शुरू हुआ। लेकिन जब योजना का लाभ देने के लिए खाता चेक किया गया, तो पता चला कि पद्मावती अस्पताल ने क्लेम के लिए ओपन किए गए आयुष्मान को क्लोज नहीं किया है।

परिजनों को करनी पड़ी भारी मशक्कत

मरीज के परिजनों को योजना का लाभ लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जब परिजनों ने पद्मावती अस्पताल में शिकायत की, तब जाकर वहां आयुष्मान का खाता क्लोज हुआ। इसके बाद ही मेडिकल कॉलेज में योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ। जो मरीज रेफर होते हैं, उनका यह हाल है। ऐसे में जिन मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी जाती है, ऐसे मरीजों का भी आयुष्मान के तहत खाता खुला रहता होगा।

नाम के नोडल अधिकारी, मॉनिटरिंग है जीरो

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के तहत योजना की मॉनिटरिंग को लेकर जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। लेकिन प्राइवेट अस्पतालों की मॉनिटरिंग जीरो है। शिकायत के लिए नोडल अधिकारी को फोन लगाने पर केवल मोबाइल की घंटी बजती रहती है। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी महोदय को अपने कार्यालय में फोन उठाने की फुर्सत नहीं है या यह काम उनके प्रभार में ही नहीं आता।

रेफर या डिस्चार्ज करने के दौरान ही आयुष्मान क्लोज करने का प्रावधान है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी।

 अनिल जगत, सीएमएचओ, रायगढ़