
Anxiety and Acidity Connection: पेट में जलन, खट्टी डकार और सीने में जलन जैसी समस्याओं को अक्सर लोग खानपान से जोड़कर देखते हैं। ज्यादा मसालेदार खाना, जरूरत से ज्यादा भोजन या देर रात खाने जैसी आदतें एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकती हैं। लेकिन क्या लगातार तनाव और एंग्जायटी भी इन लक्षणों को बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के मुताबिक, एंग्जायटी सीधे तौर पर यह जरूरी नहीं कि पेट में ज्यादा एसिड बनवाए, लेकिन तनाव और घबराहट पाचन तंत्र के काम करने के तरीके और शरीर द्वारा पेट से मिलने वाले संकेतों को महसूस करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि कुछ लोगों में एंग्जायटी के दौरान एसिड रिफ्लक्स या सीने में जलन की शिकायत ज्यादा महसूस हो सकती है।
एंग्जायटी में क्यों बढ़ सकती है एसिडिटी की परेशानी?
जब व्यक्ति तनाव या घबराहट की स्थिति में होता है, तो शरीर का तनाव संबंधी सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इसका असर पाचन की सामान्य प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, एंग्जायटी के दौरान व्यक्ति शरीर में होने वाली छोटी-छोटी संवेदनाओं को भी ज्यादा महसूस कर सकता है। ऐसे में हल्का रिफ्लक्स भी सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा जलन, भारीपन या बेचैनी जैसा महसूस हो सकता है। यानी हर बार समस्या पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड की वजह से ही हो, यह जरूरी नहीं है।
आखिर एसिड रिफ्लक्स होता क्या है?
एसिड रिफ्लक्स की स्थिति में पेट की सामग्री या एसिड वापस खाने की नली की तरफ आ सकता है। इसके कारण सीने में जलन, खट्टी डकार, मुंह में खट्टा स्वाद और ऊपरी पेट या सीने में असहजता जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके कारण अलग हो सकते हैं। ज्यादा खाना, सोने के ठीक पहले भोजन करना, बहुत तला-मसालेदार भोजन, धूम्रपान, बढ़ा हुआ वजन और कुछ दवाएं भी रिफ्लक्स की समस्या को बढ़ा सकती हैं।
एसिडिटी और एंग्जायटी एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं
इस कनेक्शन को एक तरफा समझना भी सही नहीं होगा। कभी-कभी पेट में लगातार जलन या रिफ्लक्स की परेशानी व्यक्ति को चिंतित और परेशान कर सकती है। दूसरी ओर, तनाव और एंग्जायटी कुछ लोगों में पेट से जुड़े लक्षणों को और ज्यादा महसूस करा सकती है। इस तरह पेट की परेशानी और मानसिक तनाव एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए बार-बार होने वाली समस्या में केवल एसिडिटी की दवा लेने के बजाय इसके संभावित कारणों को समझना जरूरी है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर कभी-कभार एसिडिटी होती है तो खानपान और दिनचर्या में सुधार मददगार हो सकता है। लेकिन अगर समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर निगलने में परेशानी, लगातार उल्टी, उल्टी में खून, काला मल या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। वहीं, सीने में अचानक या तेज दर्द के साथ सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना या दर्द का हाथ, कंधे या जबड़े तक फैलना महसूस हो, तो इसे केवल गैस या एसिडिटी मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें।
Disclaimer: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स या एंग्जायटी के लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह और जांच कराएं।