
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल श्रम और बाल तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित हस्तक्षेप के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) की संयुक्त टीम ने महज डेढ़ घंटे के भीतर ऑपरेशन पूरा कर बच्चों को बस से सुरक्षित बाहर निकाला। मामले में एक नियोक्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बच्चों को ले जाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चों को कथित तौर पर मशरूम फैक्ट्री में काम कराने के लिए ले जाया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में मानव तस्करी और बाल श्रम से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।
एक सूचना और तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को 5 अगस्त की शाम एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन की ओर से सूचना मिली कि रायपुर से कुछ बच्चों को बस के जरिए कथित तौर पर बाल श्रम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को सक्रिय किया। संयुक्त टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बस को ट्रैक किया और करीब डेढ़ घंटे के भीतर बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
बस में मिले 16 बच्चे, 7 नाबालिग
रेस्क्यू के दौरान बस से कुल 16 बच्चे मिले। इनमें 7 बच्चे 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के नाबालिग बताए गए हैं। सभी बच्चे बैगा जनजाति से संबंधित हैं और राजनांदगांव तथा कबीरधाम जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित बाल आश्रय गृह भेजा गया, जहां उनकी काउंसलिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक देखभाल की जा रही है।
मशरूम फैक्ट्री में काम कराने का आरोप
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चों को कचन्दूर स्थित मॉडर्न एग्रो मशरूम में काम कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। मामले में पुलिस ने लक्ष्मण पटेल नामक नियोक्ता को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 143(3), 143(5) और 111(1) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पूरे नेटवर्क की जांच शुरू
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। इसलिए बच्चों को ले जाने, भर्ती कराने और काम पर लगाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति, एजेंट या संस्था की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने दोहराई 'जीरो टॉलरेंस' नीति
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसे मामलों में आयोग 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम करता है और ऐसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
लोगों से की महत्वपूर्ण अपील
आयोग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी किसी बच्चे से मजदूरी कराई जा रही हो, बच्चों को बहला-फुसलाकर काम के लिए ले जाया जा रहा हो या बाल तस्करी की आशंका हो, तो इसकी जानकारी तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या नजदीकी पुलिस एवं संबंधित विभाग को दें। अधिकारियों का कहना है कि समय पर दी गई एक सूचना किसी बच्चे का भविष्य बचा सकती है।
बाल श्रम के खिलाफ लगातार अभियान
राज्य में बाल श्रम और बाल तस्करी रोकने के लिए प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियां लगातार संयुक्त अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील जिलों और औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि किसी भी बच्चे का शोषण न हो सके।