
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े बैंक खातों के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट को फिलहाल राहत नहीं दी है। शीर्ष अदालत ने करीब 804 करोड़ रुपये वाले चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट से लंबित सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया।
चार बैंक खातों को चलाने की TMC ने मांगी थी अनुमति
मामला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मौजूद TMC के चार खातों से जुड़ा है, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के बाद डेबिट-फ्रीज किया गया था। पार्टी ने इन खातों को संचालित करने की अनुमति मांगते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था। TMC की ओर से दलील दी गई थी कि खातों को फ्रीज करने के आधार में शामिल FIR में प्रक्रियागत खामियां हैं। इन खातों में करीब 804 करोड़ रुपये होने की बात अदालत के सामने रखी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि इस समय वह मामले के मूल विवाद में जाने के इच्छुक नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित है और खातों में मौजूद रकम पर अधिकार किसका है, यह सवाल भी अभी तय होना बाकी है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया, जिसमें चार खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को क्या कहा था?
इससे पहले 27 अगस्त 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के चार डेबिट-फ्रीज खातों को संचालित करने की मांग पर अंतरिम राहत देने से इनकार किया था। अदालत ने माना था कि पहले से दिए गए उस इंतजाम के तहत पार्टी को रोजमर्रा के खर्च चलाने की अनुमति है, इसलिए चार अतिरिक्त खातों को संचालित करने की अनुमति देना पिछले आदेश को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से सुनवाई तेज करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह अनुच्छेद 136 के तहत इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं कर रहा है और मामले के गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दे रहा। साथ ही शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट से लंबित मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। इसका मतलब यह है कि चार खातों को संचालित करने को लेकर अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई है। फिलहाल TMC को उन खातों पर मांगी गई अंतरिम राहत नहीं मिली है और मुख्य विवाद हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा।
ED की जांच वाला मामला अलग
इस विवाद को ED की कार्रवाई से जोड़ते समय एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चार खातों को डेबिट-फ्रीज करने की कार्रवाई पश्चिम बंगाल पुलिस से संबंधित है, जबकि ED ने TMC से जुड़े तीन HDFC बैंक खातों पर अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संदर्भ में कार्रवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट की 1 अक्टूबर की सुनवाई चार पुलिस-फ्रीज खातों से संबंधित थी।