बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित बिलासा एयरपोर्ट पर आज को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दिल्ली से पहुंची एलायंस एयर की फ्लाइट की लैंडिंग के दौरान विमान का टायर अचानक फट गया। घटना के बाद कुछ देर के लिए एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि विमान को सुरक्षित तरीके से रोक लिया गया और सभी यात्री सुरक्षित हैं। हादसे में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।

लैंडिंग के दौरान अचानक फटा टायर
जानकारी के मुताबिक, एलायंस एयर की फ्लाइट दिल्ली से बिलासपुर पहुंची थी। विमान सामान्य तरीके से लैंडिंग की प्रक्रिया में था, तभी अचानक उसके टायर में खराबी आ गई और टायर फट गया। अचानक हुई इस घटना से विमान में मौजूद यात्रियों और एयरपोर्ट स्टाफ के बीच कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, स्थिति को संभाल लिया गया और विमान को सुरक्षित रूप से रोक लिया गया।

बाल-बाल बचे यात्री, टला बड़ा हादसा
विमान के लैंड करते समय टायर फटने की घटना ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी, लेकिन समय रहते विमान को नियंत्रित कर लिया गया।गनीमत रही कि किसी यात्री को चोट नहीं आई। विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। घटना के बाद एयरपोर्ट और एयरलाइन से जुड़े अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की।

बिलासपुर-प्रयागराज फ्लाइट कैंसिल
विमान में आई तकनीकी खराबी का असर आगे की उड़ान पर भी पड़ा। घटना के बाद बिलासपुर से प्रयागराज जाने वाली फ्लाइट को रद्द कर दिया गया। फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी यात्रियों को दी गई। वहीं एयरलाइन की ओर से यात्रियों के लिए आगे की व्यवस्था को लेकर आवश्यक प्रक्रिया की जा रही है।

टायर फटने की वजह की जांच
फिलहाल, विमान के टायर फटने की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है। तकनीकी टीम घटना की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि लैंडिंग के दौरान टायर में किस वजह से खराबी आई। एयरपोर्ट पर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।

राहत की बात- सभी यात्री सुरक्षित
बिलासा एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुई इस घटना ने कुछ देर के लिए जरूर चिंता बढ़ा दी, लेकिन बड़ा हादसा टल गया। विमान सुरक्षित रूप से रोक लिया गया और किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विमान का टायर लैंडिंग के दौरान आखिर क्यों फटा और तकनीकी खराबी किस स्तर की थी ?