
बिलासपुर। बिलासपुर के परसदा स्थित LCIT स्कूल/कॉलेज में परीक्षा के दौरान छात्रा से छेड़छाड़ के बहुचर्चित मामले में आरोपी प्रोफेसर असीम मुखर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चकरभाठा थाने में दर्ज FIR (अपराध क्रमांक 59/2026) को रद्द कराने और गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी शिक्षक ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शरण ली है। आज (गुरुवार) माननीय मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की पीठ में इस मामले की अहम सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने फिलहाल मामले को अगली तारीख तक के लिए टाल (Adjourn) दिया है।चूंकि आरोपी प्रोफेसर अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, ऐसे में सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह उठ रहा है कि हाईकोर्ट से सुनवाई टलने के बाद क्या अब पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है?
क्या कहता है कानून: क्या अब होगी असीम मुखर्जी की गिरफ्तारी?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में आरोपी प्रोफेसर पर गिरफ्तारी की तलवार पूरी तरह से लटक रही है। इसके मुख्य कानूनी कारण इस प्रकार हैं:
स्टे या अंतरिम राहत का नहीं:
हाईकोर्ट में धारा 482 या अग्रिम जमानत (Case No. MCRCA/552/2026) की याचिका दायर कर देने मात्र से पुलिस की कार्रवाई पर स्वमेव (Automatically) रोक नहीं लग जाती। आज की सुनवाई में अदालत ने मामले को 'प्रायोरिटी ऑफ लिस्टिंग' में जरूर रखा है, लेकिन अदालत की तरफ से गिरफ्तारी पर कोई 'स्टे' (Stay on Arrest) या 'नो कोअर्सिव एक्शन' (No Coercive Action) का आदेश पारित नहीं किया गया है।
पुलिस के पास पूरे अधिकार:
जब तक हाईकोर्ट की ओर से स्पष्ट रूप से गिरफ्तारी पर रोक का लिखित आदेश नहीं आता, तब तक चकरभाठा पुलिस के पास आरोपी असीम मुखर्जी को गिरफ्तार करने का पूरा कानूनी अधिकार (Legal Authority) है।
अपराध की प्रकृति
चूंकि छात्रा से छेड़छाड़ का यह मामला संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) धाराओं के तहत आता है, इसलिए पुलिस बिना किसी वारंट के, अगली अदालत की तारीख का इंतजार किए बिना, आरोपी को कभी भी हिरासत में ले सकती है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल: 14 अप्रैल को थाने लाकर आरोपी को क्यों छोड़ा?
इस पूरे मामले में चकरभाठा पुलिस की भूमिका भी गहरे संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल को चकरभाठा पुलिस आरोपी प्रोफेसर को उसके घर से उठाकर थाने ले आई थी।आरोपी को पूरे दिन थाने में बैठाकर रखा गया, लेकिन शाम होते-होते कहानी बदल गई। उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बजाय,थाना प्रभारी (TI) ने उसे दो दिन की मोहलत देते हुए छोड़ दिया। यह सनसनीखेज खुलासा पुलिस की कार्यप्रणाली और मंशा पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। गैर-जमानती अपराध होने के बावजूद एक नामजद आरोपी को किस दबाव या कारण से थाने से बैरंग जाने दिया गया, यह जांच का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट में आज क्या हुआ?
आरोपी असीम मुखर्जी की ओर से उनके अधिवक्ताओं (अरिजीत तिवारी, प्रतिभा साहू, साक्षी देवांगन, शिवांश पाराशर) ने अदालत में अपना पक्ष रखा। वहीं राज्य शासन और चकरभाठा पुलिस की ओर से महाधिवक्ता (AG) कार्यालय ने पैरवी की। 16 अप्रैल को यह केस नए मामले के रूप में लगा था और आज इसे 'अंतिम निपटान' (Final Disposal) के लिए पेश किया गया था। अदालत ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखने या खारिज करने के बजाय इसे अगली पेशी पर प्राथमिकता से सुनने का निर्देश देते हुए स्थगित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह शर्मनाक घटना 29 जनवरी 2026 की है। पीड़िता LCIT परिसर में IKS (इंडियन नॉलेज सिस्टम) की परीक्षा देने पहुंची थी। आरोप है कि चेकिंग के बहाने ड्यूटी पर तैनात शिक्षक असीम मुखर्जी ने छात्रा के साथ अश्लील और अनुचित व्यवहार किया। घटना से आहत छात्रा ने 30 जनवरी को चकरभाठा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया।
LCIT प्रबंधन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
LCIT कॉलेज पहले भी कई विवादों में रहा है, लेकिन एक शिक्षण संस्थान में चेकिंग के नाम पर छात्रा से छेड़छाड़ ने परीक्षा प्रणाली और कॉलेज के सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।हाईकोर्ट से कोई फौरी राहत न मिलने के बाद अब सबकी निगाहें बिलासपुर पुलिस पर टिकी हैं।

