
बिलासपुर। जिले में कोयले की हेराफेरी और मिलावट के एक बहुत बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रास्ते में ही महंगे और अच्छे ग्रेड के कोयले को निकालकर उसमें रद्दी और निम्न गुणवत्ता का कोयला मिलाने वाले इस गिरोह पर सकरी पुलिस ने तगड़ा प्रहार किया है। इस पूरे काले कारोबार के फरार मास्टरमाइंड अजय कुमार सिंह को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी कोल डिपो संचालक के साथ मिलकर डिपो में कोयले की इस हेराफेरी को बेखौफ अंजाम देता था।
कैसे खुला कोयले का यह 'काला खेल'?
दरअसल, 10 जून 2026 को लोखंडी स्थित भाटिया एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि आर.के. पाण्डेय ने सकरी थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि दीपका कोल माइंस से उनकी कंपनी के लिए अच्छी क्वालिटी (एफ/जी ग्रेड) का कोयला मंगवाया गया था। 10 जून की सुबह जब तीन ट्रेलरों में लदकर यह कोयला प्लांट पहुंचा, तो लैब परीक्षण में गिरोह की पोल खुल गई। लैब टेस्ट में साफ हो गया कि ट्रेलरों में भरा कोयला निर्धारित ग्रेड का है ही नहीं।
रास्ते में ही हो जाती थी हेराफेरी
शिकायत के बाद पुलिस ने जब जांच और पूछताछ शुरू की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ट्रेलर चालकों ने पुलिस के सामने खुलासा किया कि खदान से निकलने के बाद रास्ते में ही असली कोयले की चोरी कर ली जाती थी और उसमें निम्न गुणवत्ता का कोयला मिला दिया जाता था। इस पूरे खेल में बालाजी कोल ट्रेडिंग एंड कंस्ट्रक्शन के संचालक और प्लांट के सुपरवाइजर सहित कई अन्य लोगों की तगड़ी मिलीभगत थी।
पहले 6 आरोपी जा चुके हैं जेल, अब मास्टरमाइंड भी धराया
सकरी टीआई उमेश साहू के मुताबिक, इस मामले की विवेचना करते हुए पुलिस ने पहले ही एक्शन ले लिया था। गिरोह के छह आरोपियों- आशिक हुसैन अंसारी, फैजान रजा अंसारी, फुजैल अंसारी, गौरव राजपूत, सीबू खान और दिलीप कुमार यादव को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था। लेकिन इस पूरे सिंडिकेट का एक अहम आरोपी और मास्टरमाइंड अजय कुमार सिंह (निवासी- समृद्धि विहार, कोनी) घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था। अब सकरी पुलिस ने इस फरार मास्टरमाइंड को भी दबोच लिया है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से कोयला चोरी और मिलावट करने वालों में हड़कंप मच गया है।