बिलासपुर | शहर के तोरवा क्षेत्र में संचालित हरिओम मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की प्रशासनिक और निर्माण संबंधी कमियां सामने आई हैं। वर्तमान में यह अस्पताल बिना स्थायी लाइसेंस के काम कर रहा है। जिस इमारत में मरीजों का उपचार किया जा रहा है, उसका निर्माण भी स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं किया गया है। नगर निगम से भवन का नियमितीकरण भी अब तक नहीं हो सका है। इसके साथ ही, अस्पताल के ठीक बगल में शादी घर संचालित है, जहां से आने वाले तेज शोर और आवाज के बीच मरीजों को भर्ती रखा जा रहा है।

ये है लाइसेंस प्रक्रिया और नियम 

नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत किसी भी चिकित्सा संस्थान को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्थायी लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में नगर निगम की भवन शाखा, पर्यावरण विभाग और होमगार्ड कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रस्तुत करना होता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिओम अस्पताल में 1 अप्रैल से ही मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। प्रबंधन द्वारा स्थायी लाइसेंस हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है, किंतु जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं अपूर्ण होने के कारण विभाग ने अब तक स्थायी अनुमति जारी नहीं की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में अस्पताल को महज अस्थायी अनुमति के आधार पर संचालित किया जा रहा है और स्थायी अनुमति के लिए प्रक्रिया चल रही है।

शव रोकने का प्रकरण और सीएमएचओ का नोटिस

बीते दिनों अस्पताल में एक मरीज की मृत्यु के उपरांत शव को रोके रखने का घटनाक्रम भी प्रकाश में आया। ग्राम नेउर निवासी तिलबसिया को 25 जुलाई को गंभीर अवस्था में अस्पताल में दाखिल किया गया था। परिजनों ने जानकारी दी है कि शुरुआत में उनसे 21 हजार रुपए जमा कराए गए। इसके पश्चात प्रबंधन की ओर से 84 हजार रुपए अतिरिक्त जमा करने को कहा गया। राशि नहीं चुका पाने की स्थिति में अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव सौंपने में विलंब किया गया।

इस घटना के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने अस्पताल संचालक डॉ. अभिषेक कश्यप को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अपने जवाब में डॉ. कश्यप ने बताया कि मरीज की स्थिति को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई थी और मृत्यु के बाद भी पुलिस को बताया गया था। परिजनों से संपर्क स्थापित न हो पाने की दशा में शव को सुरक्षित रखने हेतु डीप फ्रीजर में रखा गया था। सीएमएचओ ने इस स्पष्टीकरण को अपर्याप्त मानते हुए एक अलग जांच दल गठित करने का निर्णय लिया है। यह दल मामले की जांच के लिए अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज देखेगा और स्टाफ के बयान दर्ज करेगा।

नियमितीकरण की फाइल निगम में अटकी

अस्पताल भवन के निर्माण को लेकर नगर निगम के भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि इमारत का निर्माण निर्धारित नक्शे के विपरीत किया गया है। निगम की ओर से प्रबंधन को नियमितीकरण कराने के लिए नोटिस भी जारी किया गया था। प्रबंधन की तरफ से कोई उचित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके चलते नियमितीकरण की फाइल भवन शाखा में लंबित पड़ी है।

इस पूरे मामले में अस्पताल के संचालक डॉ. अभिषेक कश्यप का कहना है कि संस्थान के पास मौजूदा समय में अस्थायी लाइसेंस उपलब्ध है। स्थायी लाइसेंस की प्राप्ति के लिए आवेदन कर जरूरी शुल्क विभाग में जमा करा दिया गया है और आगामी दिनों में अनुमति मिलने की संभावना है।