
बिलासपुर। प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति, बिलासपुर एक बार फिर से भारी विवादों के घेरे में आ गई है। जमीन और प्लॉट आवंटन को लेकर पहले से ही कई गंभीर आरोपों का सामना कर रही इस समिति का अब एक नया और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&C) के अप्रूव्ड नक्शे के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया गया है। लेआउट में जिस जगह को 'गार्डन' (उद्यान) के लिए आरक्षित दिखाया गया था, वहां नियम विरुद्ध तरीके से प्लॉट काटकर बांट दिए गए हैं। वहीं, कागजी खानापूर्ति के लिए कॉलोनी की किसी अन्य खाली और अनुपयोगी जगह को गार्डन दर्शा दिया गया है।
गार्डन की जमीन पर चला खेल
नियमों के मुताबिक, किसी भी आवासीय कॉलोनी या हाउसिंग सोसाइटी में T&C के लेआउट के अनुसार एक निश्चित हिस्सा गार्डन और ओपन स्पेस के लिए छोड़ना अनिवार्य होता है। लेकिन आरोप है कि प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति के कर्ताधर्ताओं ने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। प्राइम लोकेशन वाले गार्डन की जमीन को रातों-रात प्लॉट में तब्दील कर दिया गया। जब इस गड़बड़ी पर सवाल उठने का डर सताया, तो नक्शे में हेराफेरी कर एक दूसरे खाली हिस्से को गार्डन बता दिया गया, जो T&C के मूल लेआउट से बिल्कुल मेल नहीं खाता।
विवादों से रहा है पुराना नाता
प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी पत्रकारों को प्लॉट आवंटन में मनमानी, अपात्र लोगों को सदस्य बनाकर जमीन बांटने और सोसाइटी के कामकाज में पारदर्शिता न होने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। सालों से कई पात्र पत्रकार अपने हक के प्लॉट के लिए भटक रहे हैं। पुराने विवादों और शिकायतों की फाइलें अभी पूरी तरह बंद भी नहीं हुई थीं कि अब इस 'गार्डन घोटाले' ने समिति की कार्यप्रणाली पर फिर से बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
सच छिपाने के लिए सीमांकन रोकने की साजिश
लंबे समय से चल रहे इस खींचतान और जमीनी गड़बड़ियों के बीच जब प्रशासन हरकत में आया, तो समिति के रसूखदारों के पसीने छूटने लगे हैं। बिलासपुर के अतिरिक्त तहसीलदार ने प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति की जमीन के विधिवत सीमांकन और सर्वे का औपचारिक आदेश जारी करते हुए 20 मई तक प्रक्रिया पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है।
लेकिन अब खबर है कि इस सीमांकन प्रक्रिया को रोकने या टालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राजनीतिक रसूख और तरह-तरह की बहानेबाजी का इस्तेमाल कर राजस्व अमले की कार्रवाई को बाधित करने की साजिश रची जा रही है। पर्दे के पीछे बैठे मास्टरमाइंड डर रहे हैं कि अगर निष्पक्ष नाप-जोख हो गई, तो गार्डन की जमीन पर किए गए इस अवैध कब्जे और नक्शे की हेराफेरी का पूरा भंडाफोड़ हो जाएगा।