बिलासपुर। श्रीराम लाइफ केयर अस्पताल में एक आरक्षक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप लग रहे हैं कि सिम्स प्रबंधन पूरे मामले पर पर्दा डालने और असलियत को छिपाने की पुरजोर कोशिश में जुटा हुआ है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि आरक्षक की जो शॉर्ट टर्म पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें मौत की वजह वाले कॉलम को ही खाली छोड़ दिया गया है।


रिपोर्ट में लिखी गई गोलमोल टीप


शॉर्ट टर्म पीएम रिपोर्ट में मौत के असल कारण को स्पष्ट करने के बजाय, डॉक्टरों ने एक गोलमोल टीप (नोट) लिख दी है। रिपोर्ट में सिर्फ इतना लिखा गया है कि यह जांच का विषय है। मौत की हकीकत जानने के लिए मृतक आरक्षक का बिसरा सुरक्षित कर उसे आगे की फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया गया है। जब तक बिसरा रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक मौत के सही कारणों का खुलासा होना मुश्किल है। लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में ही इस तरह का रवैया अपनाने से मामले में किसी बड़े खेल के संदेह के बादल घने हो गए हैं।


डॉक्टर को पड़ी फटकार, दबाया जा रहा मामला


सिम्स के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले को दबाने के लिए भीतर ही भीतर भारी दबाव बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आरक्षक का पोस्टमार्टम करने के लिए जो मेडिकल टीम गठित की गई थी, उस टीम के एक डॉक्टर को सिम्स के एक बड़े अधिकारी ने कड़ी फटकार लगाई है। अधिकारी की नाराजगी इसी बात को लेकर थी कि शॉर्ट टर्म पीएम रिपोर्ट में जगह खाली क्यों छोड़ दी गई है और वहां कुछ ठोस क्यों नहीं लिखा गया? इस फटकार के बाद यह अंदेशा और गहरा गया है कि सिस्टम किसी खास पक्ष को बचाने के लिए काम कर रहा है।


संदेह के घेरे में लैब इंचार्ज  सिंह की भूमिका


इस पूरे संवेदनशील मामले में पीएम लैब के इंचार्ज बीपी सिंह की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। बीपी सिंह सिम्स में लैब इंचार्ज होने के साथ-साथ सुपर स्पेशलिटी सिम्स में अधीक्षक के पद पर भी कार्यरत हैं। इसके अलावा, एक क्षेत्रीय संगठनात्मक समिति में भी पदाधिकारी के रूप में उनकी भूमिका बेहद स्पष्ट और महत्वपूर्ण है। एक साथ कई अहम पदों पर काबिज होने और लैब की सीधे तौर पर जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण, उनकी कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं। लोग दबी जुबान में चर्चा कर रहे हैं कि इतने रसूखदार पदों पर बैठे व्यक्ति के संज्ञान में आए बिना पीएम रिपोर्ट में इतनी बड़ी 'चूक' कैसे हो सकती है? संदिग्ध मौत का रहस्य: श्रीराम लाइफ केयर में आरक्षक की मौत किन वास्तविक परिस्थितियों में हुई, प्रबंधन इस पर मौन है।


 अधूरी पीएम रिपोर्ट: शॉर्ट टर्म रिपोर्ट में मौत का कारण खाली छोड़ना सीधे तौर पर लापरवाही या साजिशन की गई गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।

 

अधिकारियों का अनुचित दबाव:

 पीएम करने वाले डॉक्टर को वरिष्ठ अधिकारी द्वारा धमकाने या फटकार लगाने की खबर से मामले की लीपापोती की आशंका प्रबल हो गई है।

 अब बिसरा रिपोर्ट का इंतजार:

 अब पूरी सच्चाई बिसरा रिपोर्ट के नतीजों पर टिकी है, लेकिन जिस तरह से शुरुआत में ही गड़बड़ियां सामने आई हैं, उससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पहले ही सवालिया निशान लग चुके हैं।