
दुर्ग : बेटे की जिद या सुविधा के लिए उसे बाइक की चाबी थमाना एक पिता को कितना भारी पड़ सकता है, इसका बड़ा उदाहरण दुर्ग की अदालत के फैसले में सामने आया है। बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाले बेटे को मोटरसाइकिल देना पिता को महंगा पड़ गया। सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में सत्र न्यायालय ने न केवल बाइक चलाने वाले बेटे को कठोर सजा सुनाई, बल्कि वाहन सौंपने वाले पिता को भी जिम्मेदार मानते हुए तीन महीने के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
टक्कर से 1 को मौत, दूसरा पहुंचा अस्पताल
मामला 4 अगस्त 2025 की रात करीब 8:30 बजे का है। स्मृतिनगर चौकी क्षेत्र के इंदु आईटी स्कूल, कोहका के पास मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 07 सीडब्ल्यू 2768 के चालक मोहित कुमार बघेल ने तेज और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए एक एक्टिवा को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक्टिवा चला रहे शादान अली की मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे उत्तम पांडेय गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद थाना सुपेला के स्मृतिनगर पुलिस चौकी में अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान सामने आया कि मोटरसाइकिल चला रहे मोहित कुमार बघेल के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उसके पिता मोहन लाल बघेल ने उसे मोटरसाइकिल चलाने के लिए दे दी थी। पुलिस ने विवेचना पूरी कर दोनों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया। 31 अक्टूबर को सत्र न्यायालय दुर्ग ने मामले में फैसला सुनाते हुए वाहन चालक मोहित कुमार बघेल और उसके पिता मोहन लाल बघेल दोनों को दोषसिद्ध किया।
बेटे को 5 साल की सजा, पिता को भी 3 माह की जेल
बेटे मोहित कुमार बघेल को बीएनएस की धारा 105(2) के तहत 5 वर्ष और धारा 110(2) के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास, साथ ही मोटरयान अधिनियम की धाराओं 184 और 3/181 के तहत 10 माह और 3 माह की सजा सुनाई गई। वहीं, बिना लाइसेंस बेटे को बाइक देने वाले पिता मोहन लाल बघेल को धारा 5/180 के तहत 3 माह का साधारण कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड दिया गया। जुर्माना नहीं भरने पर पिता को 7 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।