किशनगंज। पश्चिम बंगाल में विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के मामलों में चल रही कार्रवाई के बीच बिहार-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कुछ संदिग्ध तत्व सीमावर्ती क्षेत्रों का इस्तेमाल कर आवाजाही की कोशिश कर सकते हैं। इसे देखते हुए भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

किशनगंज जिले से सटे लगभग 122 किलोमीटर लंबे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। सीमा चौकियों पर जवानों की तैनाती बढ़ाई गई है और आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में गश्त भी तेज कर दी गई है।

दिघलबैंक, ठाकुरगंज, गलगलिया, खानीबाड़ी और फतेहपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहनों और यात्रियों की सघन जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां मुख्य मार्गों के साथ-साथ वैकल्पिक रास्तों और पगडंडियों पर भी निगरानी बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, सीमा पार करने की प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित किया गया है। यात्रियों को अब वैध पहचान दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। बच्चों के लिए भी पहचान संबंधी दस्तावेज आवश्यक किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कदम सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एसएसबी और स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, गतिविधि या अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दी जानी चाहिए। सुरक्षा बलों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में स्थानीय लोगों की सतर्कता भी अहम भूमिका निभाती है।