
रायपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को देश की 66 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ क्षेत्र में वर्षों से स्वास्थ्य सेवा दे रहे डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले का नाम भी शामिल रहा। बस्तर के आदिवासी इलाकों में ‘डॉक्टर भैया-भाभी’ के नाम से पहचान बनाने वाले इस दंपती को पद्मश्री सम्मान देकर उनके मानव सेवा के असाधारण योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। जंगलों और दूरस्थ गांवों में चिकित्सा सुविधा पहुंचाने वाले इस दंपती ने हजारों जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
महाराष्ट्र के सतारा से ताल्लुक रखने वाले डॉ. गोडबोले दंपती वर्ष 1990 में दंतेवाड़ा पहुंचे थे। तब से उन्होंने दक्षिण बस्तर, बीजापुर, सुकमा और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में रहकर आदिवासी समाज की सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों डॉक्टर लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों का इलाज करते रहे। अब तक एक लाख से अधिक मरीजों का नि:शुल्क उपचार कर चुके इस दंपती ने कुपोषण, एनीमिया और प्राथमिक स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में भी बड़ा काम किया है।
डॉ. रामचंद्र गोडबोले, जिन्हें स्थानीय लोग प्यार से ‘डॉक्टर भैया’ कहते हैं, का मानना है कि “मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान है।” यही सोच उन्हें वर्षों से बिना किसी प्रचार या सुविधा की चिंता किए सेवा कार्य में सक्रिय रखे हुए है। वहीं डॉ. सुनीता गोडबोले महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता अभियान से जुड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रही हैं। दोनों मिलकर गांव-गांव जाकर मेडिकल कैंप आयोजित करते हैं और मरीजों का लगातार फॉलो-अप भी करते हैं।
केंद्र सरकार द्वारा दिया गया यह सम्मान केवल दो डॉक्टरों की उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर की सेवा भावना और समर्पण की पहचान माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने भी गोडबोले दंपती को बधाई देते हुए कहा कि उनका योगदान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन लोगों के लिए भी संदेश है जो कठिन परिस्थितियों में समाज के लिए निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं।
देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार कला, समाज सेवा, चिकित्सा, शिक्षा और विज्ञान समेत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को दिए जाते हैं। इस वर्ष समाज सेवा के क्षेत्र में दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को भी अगले चरण में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। बस्तर की धरती से निकल रही ये प्रेरणादायक कहानियां यह साबित करती हैं कि सच्ची सेवा और समर्पण किसी पहचान के मोहताज नहीं होते।