नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने फिलहाल CEC को निलंबित करने या उनके अधिकारों पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच की जरूरत बताई। अदालत यह देखना चाहती है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, वे आयोग की निर्धारित सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत लिए गए थे या नहीं।

एकतरफा फैसलों के आरोप पर कोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्थान में कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। खासतौर पर SIR और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया। अदालत का कहना है कि आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ECI के आधिकारिक रिकॉर्ड और जवाब देखना जरूरी है।

EC के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग के निर्णय निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए। यदि किसी मामले में आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद हो, तो निर्णय की वैधता तय करने के लिए लागू नियमों के अनुसार सामूहिक प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा। अदालत ने संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड की जांच के बाद किसी फैसले में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है, तो वह संबंधित निर्णयों की वैधता पर उचित आदेश पारित कर सकती है।

14 फैसलों पर आपत्ति का दावा
एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR, मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की तकनीकी व्यवस्था से जुड़े मामलों में कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस तरह की असहमति को संस्थागत निर्णय प्रक्रिया में सामान्य सवाल और सुझाव के तौर पर पेश किया है। आयोग का कहना है कि SIR की समय-सारणी से संबंधित अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

Form 6 को लेकर भी उठा सवाल
सुनवाई में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस फॉर्म में बदलाव के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर भी रिकॉर्ड देखने की जरूरत जताई है। इससे पहले चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि SIR अवधि के दौरान Form 6 से जुड़ी घोषणा संबंधी व्यवस्था लागू थी, जबकि सामान्य अवधि में मौजूदा नियम लागू होते हैं।

याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में CEC के कामकाज और आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में SIR से जुड़े फैसलों की वैधता की जांच और कथित तौर पर एकतरफा लिए गए निर्णयों पर कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या CEC ऐसी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कानून के तहत पूरे बहुसदस्यीय चुनाव आयोग से संबंधित हैं।

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। अगला महत्वपूर्ण चरण चुनाव आयोग की ओर से रिकॉर्ड और जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत यह जांच करेगी कि SIR और अन्य विवादित फैसले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिए गए थे या नहीं। यदि रिकॉर्ड से कानून या संवैधानिक प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो सुप्रीम कोर्ट संबंधित फैसलों पर उचित आदेश दे सकता है। इस मामले में अगली सुनवाई और चुनाव आयोग के जवाब से तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।