प्रयागराज: Census 2027 की तैयारियों के बीच जनगणना ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों के अलग-अलग ‘बहाने’ सामने आने लगे हैं। चुनावी ड्यूटी की तरह ही इस बार भी कई कर्मचारी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश में जुटे हैं। खासकर महिला कर्मचारियों द्वारा मेटरनिटी लीव के आवेदन और छोटे बच्चों का हवाला देकर ड्यूटी से छूट मांगने के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिससे प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, जनगणना के लिए लगभग 17 हजार प्रगणक और सुपरवाइजरों की तैनाती की जानी है, जिसमें अब तक 13 हजार से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी तय की जा चुकी है। इसमें बेसिक शिक्षा, नगर निगम, सिंचाई, विद्युत, लोक निर्माण समेत कई विभागों के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। हालांकि ड्यूटी लगने के साथ ही सिफारिशों और छूट के आवेदन का सिलसिला भी तेज हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, अब तक 127 महिला कर्मचारियों ने मेटरनिटी लीव के लिए आवेदन किया है, जबकि 100 से ज्यादा ने पारिवारिक कारणों का हवाला देकर ड्यूटी से नाम हटाने की मांग की है। वहीं करीब 400 पुरुष कर्मचारियों ने भी स्वास्थ्य और अन्य कारणों का हवाला देते हुए आवेदन दिए हैं। प्रशासन ने ऐसे मामलों में मेडिकल प्रमाणपत्र अनिवार्य करते हुए सख्ती दिखानी शुरू कर दी है।

जनगणना प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन ने प्रशिक्षण और तकनीकी तैयारियों को भी गति दी है। इस माह तहसील स्तर पर गणनकों और सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। प्रत्येक गणनक को लगभग 800 लोगों की गणना का जिम्मा दिया जाएगा। जिले में अब तक 11 हजार से अधिक गणना ब्लॉक बनाए जा चुके हैं और 88 प्रतिशत डिजिटल मैपिंग का काम पूरा हो चुका है।

जिला प्रशासन का कहना है कि जनगणना का पहला चरण 22 मई से 30 जून तक चलेगा, जबकि स्वगणना की प्रक्रिया 7 मई से शुरू होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण कार्य है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में ड्यूटी से बचने के प्रयासों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी हो सके।